कश्मीर के प्रसिद्ध सामाजिक-पर्यावरणविद् डॉ. तौसीफ अहमद ने दुबई में आयोजित एक वैश्विक सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन और सामाजिक उद्यमिता पर अपने पहले अंतरराष्ट्रीय भाषण के ज़रिए नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस कार्यक्रम में दुनिया भर से आए विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और नवाचारियों ने भाग लिया।
सम्मेलन की थीम “स्थायित्व और सामाजिक उद्यमिता” थी, जिसमें पर्यावरणीय संकटों के समाधान के लिए समुदाय-आधारित और व्यावहारिक उपायों पर चर्चा की गई। डॉ. तौसीफ ने अपने भाषण में पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक व्यवसाय के मध्य गहरे संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि “स्थायी विकास केवल तब संभव है जब इसमें समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी हो।”
डॉ. तौसीफ ने कश्मीर में अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने स्थानीय युवाओं को पर्यावरण अनुकूल उद्यमों से जोड़ा और जैव विविधता संरक्षण की दिशा में सामुदायिक प्रयासों को बढ़ावा दिया। उनका मानना है कि अगर वैश्विक स्तर पर सामाजिक उद्देश्य वाले स्टार्टअप्स को समर्थन मिले, तो जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है।
इस सम्मेलन में इटली, अमेरिका, फ्रांस, ब्राज़ील, ब्रिटेन, रूस, कतर, इक्वाडोर, ईरान और अन्य देशों के भी विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। डॉ. तौसीफ के विचारों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने सराहा और उन्हें एक युवा प्रेरक व्यक्तित्व के रूप में देखा।
कश्मीर के लिए गर्व का क्षण:
डॉ. तौसीफ की इस वैश्विक मंच पर सहभागिता ने न केवल कश्मीर, बल्कि पूरे भारत का मान बढ़ाया है। उनके प्रयास यह दिखाते हैं कि सीमित संसाधनों और जटिल परिस्थितियों के बावजूद, स्थानीय पहल कैसे वैश्विक प्रभाव छोड़ सकती है।