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राजस्थानी साहित्य के मेधावी विद्यार्थी प्रथम बार नगद पुरस्कार प्राप्त करने पर उनके चेहरे खिले

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग
राजस्थानी साहित्य के मेधावी विद्यार्थी प्रथम बार नगद पुरस्कार प्राप्त करने पर उनके चेहरे खिले ।डाक्टर नृसिंह राजपुरोहित स्मृति कोष खंडप द्वारा राजस्थानी साहित्य मेधावी विद्यार्थियों का जिला स्तरीय सम्मान समारोह आयोजित किया गया।
स्मृति कोष के संयोजक सालगराम परिहार ने बताया कि एस एन वोहरा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जसोल के परिसर में राजस्थानी साहित्य कक्षा 12 बोर्ड परीक्षा में शत प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों का जिला स्तरीय सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि जिला शिक्षा अधिकारी राम अवतार रावल ने अपने संबोधन में कहा कि राजस्थानी साहित्य की लोक संस्कृति उत्कृष्ट एवं लोक लुभावनी रही है। राजस्थानी भाषा आदर्श प्रस्तुत करती है। विद्यार्थी राजस्थानी साहित्य में उच्च अध्ययन कर अपने भविष्य को उज्जवल बनाएं। कार्यक्रम के अध्यक्ष पूर्व उपनिदेशक पृथ्वीराज दवे ने कहा कि राजस्थानी लोकोक्तियां एवं मुहावरे का प्रभाव लंबे समय से लोगों की जुबान पर रहता है। राजस्थानी साहित्य में जो विशेषताएं है उनको अंगीकार करें।
जेठनाथ गोस्वामी ने कहा कि डाक्टर नृसिंह राजपुरोहित स्मृति कोष का प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए विशेष योगदान रहा।
समय-समय पर आर्थिक दृष्टि से कमजोर प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान कर उनका सहयोग किया गया। राजस्थानी भाषा को मान्यता मिलने के लंबे समय से प्रयास किया जा रहे हैं जिससे सफलता मिलने पर राजस्थानी भाषा के विद्यार्थी और आगे बढ़ सकेंगे।
उप प्रधान शैतान सिंह ने कहा कि स्मृति कोष के द्वारा राजस्थानी कवि सम्मेलन एवं राजस्थानी कहानियों का प्रकाशन तथा राजस्थानी भाषा में आयकर की पुस्तक का भी प्रकाशन किया गया।
इस अवसर पर कक्षा 12 के मेधावी विद्यार्थी बुद्धाराम भाडियावास, दिनेश भाडियावास, कविता पालीवाल, नरेश कुमार खंडप, बालिका सुमन पटाऊ का प्रत्येक विद्यार्थी को ग्यारह ग्यारह सौ रुपए का नकद पुरस्कार, स्मृति चिन्ह प्रदान कर एवं माला पहनाकर अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। स्थानीय विद्यालय के बालकों द्वारा लोकगीत एवं लोक नृत्य प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम में प्रधानाचार्य जीवराज सिंह चारण ने कहा कि राजस्थानी साहित्य के विद्यार्थी मनोबल के साथ पढ़कर के राजस्थान का नाम रोशन करें। राजस्थानी साहित्य हमारी परंपरा के अनुसार जन-जन दिल और दिमाग में बनाए रखना के प्रयास करने पर ही हम सफल होंगे, प्रधानाचार्य शशि वाला, प्रधानाचार्य विष्णु दास संत, राजस्थानी भाषा की व्याख्याता नारायण लाल का साफा एवं माला पहनाकर स्वागत किया गया।
इस अवसर पर छात्रा कविता ने भी विचार व्यक्त करते हुए कहा कि राजस्थानी भाषा की उडीक ने विशेष प्रभावित किया।
इस अवसर पर शारीरिक शिक्षक हरिश्चंद्र शर्मा, सेल वाला खत्री, देवी दवे सहित विद्यालय स्टाफ एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन साहित्यकार छगनलाल व्यास ने किया।

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