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श्रीडूंगरगढ़ से तीन बार विधायक रहे किशनाराम नाई का निधन

बीकानेर से डॉ राम दयाल भाटी
श्रीडूंगरगढ़ से तीन बार विधायक रहे खाँटी नेता गरीब एवं पिछड़ों हेतु सत्ता के लिए ओर सत्ता से लड़ने वाले भाजपा के संस्थापक सदस्य श्री किशनाराम जी नाई के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद एवं पीड़ादायक है !
उनका जनसेवा के प्रति समर्पण, सादगीपूर्ण जीवन और समाज के प्रति योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा ! 🙏🙏
वे एक सच्चे जनप्रतिनिधि थे !
जिनका जीवन आमजन के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा !
ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें एवं अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को यह आघात सहने की शक्ति दें !👏👏
भावभीनी श्रद्धांजलि !! 💐💐
प्रारंभिक जीवन
किशनाराम नाई का जन्म 1 जनवरी 1935 को श्रीडूंगरगढ़ में हुआ था। वह एक साधारण नाई परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता का नाम बस्तीराम नाई और माता का नाम चंदा देवी था, उनका विवाह श्रीडूंगरगढ़ के एक छोटे से गांव भोजास में हुआ था। उनकी पत्नी का नाम मुकना देवी था। उनके दो बेटे मदन जी , स्वर्गीय जीवराजजी और चार बेटियां सीता , शारदा , भंवरी, लक्ष्मी है ।
किशनाराम नाई ने अपनी राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1956 में नगरपालिका पार्षद के रुप में की और लगातार पार्षद, नगरपालिका उपाध्यक्ष एवं अध्यक्ष बने ! उसके बाद यह तत्कालीन श्रीडूंगरगढ़ विधायक स्वर्गीय मोहन लाल जी शर्मा के साथ रहने लगे, उनके साथ जयपुर का आना जाना शुरू हो गया और उसी समय तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय भैरोंसिंह जी शेखावत के साथ मुलाकात हो गई और स्वर्गीय भैरोंसिंह शेखावत के चहते बन गए, जब 1980 में जन संघ से भाजपा बनी तो किशनाराम नाई को पार्टी मजबूत करने के लिये भैरोसिंह शेखावत ने चूरू की कमान सौंपी ! भारतीय जनता पार्टी बनने के बाद पहली बार दिसम्बर 1980 में विधानसभा चुनाव आए और किशनाराम नाई को श्रीडूंगरगढ़ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा ने अपना उम्मीदवार उतारा और हार का सामना करना पड़ा! तत्पश्चात 1985 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने किशनाराम नाई को टिकट नहीं दी तो निर्दलीय चुनाव लडा और इसी में भी हार का सामना करना पड़ा !
लेकिन किशनाराम नाई को 1990 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने वापिस अपना उम्मीदवार बनाया, राजस्थान के दिग्गज नेता कुंभाराम आर्य को हराकर पहली बार विधानसभा पहुंचे ! लेकिन यह कार्यकाल राम मंदिर निर्माण के बवाल के मात्र दो वर्ष छः महीने चला और वापिस 1993 में विधानसभा चुनाव में किसनाराम नाई को ही उम्मीदवार बनाया और केंद्रीय कपड़ा मंत्री दिग्गज नेता दौलतराम सारण को हराकर दूसरी बार विधानसभा पहुंचे ! 1998 के चुनाव में पार्टी ने वापस अपना उम्मीदवार घोषित किया, लेकिन एंटी इनकंबेंसी के कारण हार का सामना करना पड़ा ! 2003 में टिगट लेकर वापस चुनाव लड़ा, लेकिन कांग्रेस के नेताओं के इशारे पर ताराचंद सारस्वत निर्दलीय चुनाव लड़ा और किशनाराम नाई को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन किशनाराम नाई हार से डर कर पीछे नहीं हटे ! क्षेत्र में डटे रहे और 2008 में भारतीय जनता पार्टी ने इन्हें टिकट नहीं दी तो निर्दलीय चुनाव लड़ा और दूसरे नंबर रहकर कांग्रेस के प्रत्याशी को चुनौती दी, फिर भारतीय जनता पार्टी ने वापिस 2013 में किशनाराम नाई को टिकट दी और तीन बार के विधायक मंगलाराम गोदारा को हराकर तीसरी बार विधानसभा पहुंचे !
किशनाराम नाई नगरपालिका अध्यक्ष, भाजपा के चुरु से दो बार जिला अध्यक्ष एवं बीकानेर देहात से दो बार जिला अध्यक्ष रहे ! भाजपा प्रदेश मंत्री रहे, बहुत बार लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव के प्रभारी भी रहे ! भाजपा पार्टी के संस्थापक सदस्य रहे हैं !

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