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शिक्षा और संस्कार के महत्व पर आधारित शिक्षक महाकुंभ का आयोजन

वक्ताओं ने शिक्षा और संस्कार की भूमिका पर प्रकाश डाला

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग बालोतरा

 

श्री वर्धमान जैन स्थानकवासी संस्थान के तत्वाधान में आयोजित शिक्षक महाकुंभ में मधुर व्याख्यानी श्री गौतम मुनि ने कहा कि *संस्कार देने से नहीं, संस्कार जीने से आते हैं।* स्थानक भवन में आयोजित *शिक्षा ही नहीं संस्कार भी देता हूं ,भावी सपनों को आकार देता हूं* विषय पर आयोजित शिक्षक महाकुंभ में आचार्य श्री हीराचंद्र जी महाराज साहब के आज्ञानुवर्ती मधुर व्याख्यानी श्री गौतम मुनि ने कहा कि शिक्षा से जीवन ज्ञानवान बनता है एवं संस्कारों से और अधिक प्रज्ञावान बन जाता है । मास्टर शब्द का तात्पर्य है कि जो मां की स्तर का बच्चों को वात्सल्य, स्नेह प्रदान करता है । बच्चा वही है जो बुराई से बचा हुआ है, बच्चे मन के सच्चे होते हैं। उनमें देशभक्ति ,राष्ट्र प्रेम संस्कार एवं संस्कृति के गौरव को जगाने के साथ उनकी प्रतिभा के अनुरूप उन्हें आगे बढ़ाने में शिक्षक की महत्व भूमिका रहती है , मुनि श्री ने विभिन्न इतिहास के प्रसंगों पर भी प्रकाश डाला।शिक्षक महाकुंभ में पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी पृथ्वीराज दवे ने कहा कि वर्तमान में शिक्षा में प्राय केवल अंकों को रिजल्ट को देखा जाता है , गुणों को नहीं । हमें गुणों में अभिवृद्धि प्रयास करने की आवश्यकता है। अभिभावक भी अपने सपनों को साकार करने की बजाय, बालक के सपनों को साकार करने में योगदान दें । अखिल भारतीय श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्ञानेंद्र बाफना ने कहा शिक्षा से जीवन का निर्माण होता है वही संस्कारों से गुणों से युक्त होकर सबके लिए प्रेरणादायक बन जाता है। आचार्य श्री हस्तीमल जी महाराज साहब का जीवन प्रसंगों के माध्यम से गुरु की महत्ता बताते हुए शिक्षा और संस्कार की बात कही, साथ ही शिक्षा के साथ दिए गए संस्कार के कारण ही सुदामा ने स्वाभिमान कभी नहीं छोड़ा, तो कर्मयोगी श्री कृष्ण ने अपने महानता को भी कभी नहीं त्यागा। युवा उद्यमी,चिन्तक जसवंत गोगड़ ने वर्तमान समय में शिक्षकों एवं शिक्षा जगत की चुनौतियों का वर्णन करते हुए कहा कि शिक्षा मात्र आजीविका लक्ष्य ना हो, वरन् गुणो में अभिवृद्धि हो, कार्य क्षमता में अभिवृद्धि हो यह शिक्षा का लक्ष्य होना चाहिए। शिक्षा में शिक्षक केवल व्यवहारिक शिक्षा ही नहीं गुणात्मक शिक्षा पर ध्यान दें। वर्धमान जैन स्थानकवासी संस्थान के मंत्री ओम बांठिया ने स्वागत भाषण में विषय की सार गर्भिता को दर्शाते हुए कहा कि वर्तमान में हम जितना गूगल पर विश्वास करते हैं उतना गुरु पर नहीं। जबकि माता-पिता, गुरु जीवन में जन्म ,संस्कारी जीवन ही नहीं देते वरन् संस्कारों से एक शिल्पी के रूप में प्रतिभा को उजागर करने में महती भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम के संचालक प्रमेन्द्र बाफना ने सुन्दर शब्दों से संचालन के साथ ही शिक्षक की पीड़ा विषय पर कविता प्रस्तुत की । आयोजित शिक्षक महाकुंभ में श्री वर्धमान आदर्श विद्या मंदिर ,नवकर विद्या मंदिर, तुलसी किड्स स्कूल, शांतिनिकेतन ,मदर टेरेसा स्कूल, ज्ञान दिशा स्कूल एवं खेतेश्वर शिक्षण संस्थान के प्रबंध समिति सदस्यों तथा शिक्षकों ने

भाग लिया । कार्यक्रम में श्री वर्धमान जैन स्थानकवासी संस्थान के अध्यक्ष मोतीलाल हुंडिया , पूर्व अध्यक्ष खीमराज भंडारी,कोषाध्यक्ष दीपक भंडारी, सहमंत्री जसराज तातेड, चातुर्मास व्यवस्था समिति संयोजक शांतिलाल अन्याव, वर्धमान आदर्श विद्या मंदिर के अध्यक्ष पुष्पेंद्र तातेड , तुलसी किड्स के अध्यक्ष सुभाष मेहता ,शांतिनिकेतन के सचिव ओम प्रकाश चोपड़ा, प्रिंसिपल सुधा मैडम, मदर टेरेसा विद्यालय के अध्यक्ष कमलेश बोहरा ,

ज्ञान दिशा स्कूल के प्रबंधक विशाल पटवारी, नवकार विधा मंदिर के अमृतलाल, मानवेन्द्र ओस्तवाल, के साथ ही लाभार्थी परिवार के पारसमल जसवंत कुमार गोगड (हीरामणि ग्रुप), कमलेश चोपड़ा,गौतम मधुर, विनय मोदी, सहित बड़ी संख्या में संघ के महानुभाव एवं पदाधिकारी ने भाग लिया। खुले मंच कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों के शिक्षकों ने अपने विचार भी व्यक्त करते हुए

ऐसे आयोजन समय-समय पर होने के संदर्भ में भी सुझाव प्रदान किए गए।

Santosh Kumar Garg

Beauro Chief Balotra Rajasthan

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