गुरुवार को सुबह 10 बजे जसोल के पुराने ओसवाल भवन में अणुव्रत समिति जसोल की एक आवश्यक बैठक आयोजित की गई। बैठक का आयोजन अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदुषी सुशीष्या साध्वी श्री रति प्रभा जी बालोतरा आदि ठाणा (4) के सानिध्य में तथा समिति अध्यक्ष श्री महावीरचंद सालेचा की अध्यक्षता में हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत साध्वी श्री जी ने नवकार महामंत्र के उच्चारण से की। इसके बाद अणुव्रत सदस्यों ने “संयम मय जीवन हो” गीतिका का मधुर गायन प्रस्तुत किया। मंत्री श्री सफरूखान ने अणुव्रत आचार संहिता का वाचन किया।
अध्यक्ष श्री महावीरचंद सालेचा ने सभी आगंतुकों का स्वागत करते हुए जानकारी दी कि गत 6 से 8 सितम्बर तक अहमदाबाद के कोबा क्षेत्र स्थित प्रेक्षा विश्वभारती प्रांगण के वीर भिक्षु समवसरण में अणुव्रत का 76वां अधिवेशन सम्पन्न हुआ। यह अधिवेशन अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी के सानिध्य एवं अणुव्रत विश्वभारती सोसायटी के अध्यक्ष श्री प्रतापसिंह दुगड़ की अध्यक्षता में हुआ, जिसमें देश-विदेश से 69 समितियों और मंचों के 367 प्रतिनिधियों ने सहभागिता दर्ज करवाई।
उन्होंने बताया कि जसोल अणुव्रत समिति के चार सदस्यों ने भी इस अधिवेशन में भाग लिया—
1. श्री महावीरचंद सालेचा (अध्यक्ष)
2. श्री पारसमल गोलेछा (निवर्तमान अध्यक्ष)
3. श्री भकामचंद छाजेड़ (कोषाध्यक्ष)
4. श्री सफरूखान (मंत्री)।
अधिवेशन के दौरान वर्ष 2024-25 के कार्यों का अवलोकन कर राष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहन स्वरूप अणुव्रत विश्वभारती सोसायटी की ओर से जसोल समिति को मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान जसोल के इतिहास के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया गया।
सभा में उपस्थित जनों ने “ॐ अर्हम” एवं “जय अणुव्रत” के उद्घोष से समिति का स्वागत किया। तेरापंथ सभा की ओर से श्री सम्पतराज चोपड़ा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। साध्वी श्री जी एवं अन्य साध्वियों ने समिति अध्यक्ष व टीम को मंगलपाठ सुनाकर उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कार्यक्रम का सफल संचालन मंत्री श्री सफरूखान ने किया।