जनपद पंचायत मनासा उड़ा रही सूचना के अधिकार अधिनियम की सरेआम धज्जियां
कमाऊ पुत और अधिकारी की मिली भगत से आवेदकों को नहीं मिल रही है कोई जानकारी
खुलासा जल्द ही….
मनासा,नीमच वैसे तो कहा जाता है कि भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए कई ऐसे संसाधनों का उपयोग कर भ्रष्टाचार को उजागर किया जाता था वही देखा जा रहा है कि सूचना के अधिकार अधिनियम में जानकारी मांगने पर जानकारी प्रदान नहीं की जाती है और आवेदन करता को गुमराह किया जाता है और ऐसे में ग्राम पंचायत सरपंच सचिव के काले कारनामों को उजागर करने पर सरपंच सचिव आवेदक करता को अननोन नंबरों से फोन लगवकर उन्हें आवेदन उठाने के लिए बाध्य किया जाता है या फिर अन्य नए-नए हथकंडे अपनाए जा रहे है।पंचायत से जानकारी मांगने पर पंचायत सचिव और सरपंच अपने मिलने वालों से फोन लगवाकर भ्रष्टाचार को उजागर करने में बाधक बन रहे हैं, इससे यह प्रतीत होता है कि अधिकारी को सरपंच और सचिव के द्वारा काली कमाई का कुछ हिस्सा दिया जाता है ऐसे में अधिकारी भी जब सूचना के अधिकार अधिनियम में अपील की जाती है। अपीली दिनांक देने के लिए काफी लंबा समय कर देते हैं । नहीं तो जानकारी मिलती है और नहीं तारीख मिलती है। शायद उसके बाद राज्य सूचना आयुक्त का सहारा लेना पड़ता है राज्य सूचना आयोग में भी कई बार मुसीबत का सामना करना पड़ता है मगर देखते हैं कि जब शासन के इस नियमों की धज्जियां किस प्रकार से बड़े से बड़े अधिकारी उड़ाते दिखाई दे रहे हैं।
मामला जनपद पंचायत मनासा का जहा सुचना अधिकार अधिनियमों के तहत पंचायत द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी नहीं देने पर जनपद पंचायत मनासा में प्रथम अपील की गई बावजूद कई लंबी तारीख होने के बाद भी। ना तो तारीख मिली। नहीं जानकारी दे पाए जिम्मेदार अधिकारी सीईओ पीसीओ अधिकारी। आवेदन करता को किया जा रहा है गुमराह।।।।। एक नहीं कई बार अपील करने के बाद भी नहीं दे पाए आज तक कोई जानकारी भ्रष्ट पंचायतो का लेखा-जोखा नहीं दे पाए आज तक ना कोई जानकारी सूचना अधिकार अधिनियमों की धज्जियां उड़ाते दिखाई दे रहे हैं आखिर क्यों लोग सूचना अधिकारी सूचना
के अधिकार अधिनियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं आखिर क्यों बचा रहें हैं? इन भ्रष्ट पंचायतो को जिन पंचायत से मांगी गई जानकारी । जनपद पंचायत में उपलब्ध नहीं है। इन पंचायत की जानकारी। जनपत के अधिकारी कर्मचारियों कर रहे हैं अपने पद का दुरुपयोग। कैसे-कैसे खेल खेलते हैं। एक आद तारीख देते हैं फिर व्हाट्सएप से करते हैं संपर्क पर नहीं दे पाते हैं जानकारी। ।।।।। एक बार सच्चाई को हारना पड़ेगा या कलम की जीत हो पाएगी देखते हैं की सूचना अधिकार अधिनियम की कब तक धज्जियां उड़ाते हैं। आपको यह बता दे की भोपाल में सहायक संचालक द्वारा भी।सूचना अधिकार अधिनियम की जरिया उड़ने पर 25000 की राशि का जुर्माना उच्च अधिकारियों द्वारा लगाया गया है क्या ऐसे कई मामले नीमच जिले के अंदर भी जब सूचना अधिकार लगाई जाती है तो ऐसी राशि का हरिजाना क्यों नहीं लगाया जाता है ताकि सूचना अधिकार अधिनियमों की धज्जियों न उड़ाई जा सके और कई कारनामें आम जनता के बीच ले जा सके। सूचना अधिकार बनाया गया था की इस अधिकार द्वारा भ्रष्टाचार को उजागर किया जा सके। मगर इसका भी दुरुपयोग लोक सूचना अधिकारी द्वारा किया जा रहा है। देखते हैं की कब तक लोक सूचना अधिकारी अपने चहीते पंचायत के कर्मचारीयो को बचाएगा?