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जयपुर: जैसलमेर आधुनिक युद्ध में ड्रोन, मिसाइल और एयर डिफेंस की बढ़ी भूमिका राजनाथ सिंह

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी
*04 नम्बर बुधवार 2026-27*
*जयपुर:* जैसलमेर। आधुनिक युद्ध के तौर-तरीकों में तेजी से हो रहे बदलाव के बीच भारतीय सेनाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने और सैन्य संरचनाओं में बदलाव की प्रक्रिया तेज की जा रही है। ड्रोन, मिसाइल और एयर डिफेंस नेटवर्क ने युद्ध की पारंपरिक रणनीति बदल दी है। ऐसे में सेना का आधुनिकीकरण और नई सैन्य इकाइयों का गठन भविष्य की सुरक्षा जरूरतों के लिए अनिवार्य है। यह बात केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जैसलमेर में रक्षा मंत्रालय की संसदीय परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता करते कही।
उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में इजरायल-ईरान तनाव का उल्लेख करते कहा, मौजूदा संघर्षों से स्पष्ट है कि भविष्य के युद्ध में सैनिकों की संख्या के साथ तकनीकी श्रेष्ठता, निगरानी क्षमता और त्वरित निर्णय महत्वपूर्ण होंगे। भारतीय सेनाओं को आगामी दशकों की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने के लिए सरकार तीन प्रमुख क्षेत्रों पर काम कर रही है। इनमें रक्षा बजट एवं पूंजीगत खरीद, घरेलू रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता तथा मानव संसाधन और सैन्य संरचनाओं में सुधार शामिल हैं। बैठक में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और समिति के अन्य सदस्य मौजूद रहे।
*रक्षा बजट और उत्पादन में बढ़ोतरी:*
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा बजट बढ़ाकर 7.85 लाख करोड़ रुपए किया गया है। इसमें 2.19 लाख करोड़ रुपए आधुनिकीकरण और पूंजीगत खरीद के लिए निर्धारित हैं। रक्षा मंत्री ने बताया कि वर्ष 2014-15 में देश का रक्षा उत्पादन 46,429 करोड़ रुपए था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर करीब 1.78 लाख करोड़ रुपए हो गया। इससे घरेलू रक्षा उद्योगों और एमएसएमई की भागीदारी को भी बढ़ावा मिला है।
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