बच्चों का ,मोबाइल देखने का समय भी फिक्स करें माता-पिता: उर्वशी दत्त बाली
Parents should also fix the time for children to watch mobile phones: Urvashi Dutt Bali

ब्यूरो रिपोर्ट… रामपाल सिंह धनगर
काशीपुर। समाज सेविका एवं डी बाली ग्रुप की डायरेक्टर श्रीमती उर्वशी दत्त बाली वर्तमान में बच्चों के मोबाइल देखने की उत्पन्न हुई सबसे बड़ी समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए कहती है कि छठी-सातवीं कक्षा के बच्चे जिसे ‘सच्चा प्यार’ समझ बैठते हैं, मनोविज्ञान में वह महज एक हार्मोनल ‘केमिकल ट्रैप’ है।

इस उम्र में भावनाओं का दिमाग तो सक्रिय रहता है, लेकिन सही-गलत का फैसला करने वाला हिस्सा पूरी तरह विकसित ही नहीं होता। इस स्थिति पर चिंता जताते हुए उर्वशी दत्त बाली का कहना है कि जब ऊर्जा चैटिंग, रील्स और ओवरथिंकिंग में खर्च होगी तो फिर बच्चों में बोर्ड्स और करियर के लिए फोकस कहाँ से बचेगा।

बच्चों को सोचना होगा किप्यार, मोहब्बत और सोशल मीडिया तो उम्र भर मिलते रहेंगे, लेकिन यह बीता हुआ सुनहरा समय और करियर कभी लौटकर नहीं आएगा। उर्वशी दत्त बाली साफ कहती हैं कि बच्चों को अपनी ताकत सस्ते ड्रामे में नहीं, बल्कि अपने सपनों और काबिलियत को निखारने में लगानी चाहिए क्योंकि काबिल बनोगे तो कद्रदान अपने आप मिलेंगे।

इस भटकाव में बच्चों का कोई कसूर नहीं, सारी गलती मां-बाप की लापरवाही की है। जब स्कूल, ट्यूशन, खेल और खाने का वक्त तय है, तो मोबाइल का समय क्यों नहीं बांधा जाता? समाज सेविका उर्वशी दत्त बाली का स्पष्ट मानना है कि बच्चों को ऐसे फैसले लेने की छूट नहीं दी जा सकती जो उनकी जिंदगी बर्बाद कर दें।

समाधान बिल्कुल सीधा है: मोबाइल दिनभर बच्चों के हाथ में नहीं, बल्कि ताले में बंद रहना चाहिए। उर्वशी दत्त बाली के अनुसार, बच्चों को मोबाइल केवल 1 घंटे—रात 9:00 से 10:00 बजे तक—ही दिया जाए और समय खत्म होते ही वापस ले लिया जाए।
अंत में उर्वशी दत्त बाली अभिभावकों को आगाह करती हैं कि अगर आज बच्चों पर समय की यह सख्त पाबंदी नहीं लगाई, तो कल हाथ मलने के अलावा कुछ नहीं बचेगा, ओर गलती सिर्फ मां बाप की ही होगी।
Subscribe to my channel


