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जसोल नगरी में हुआ साध्वी श्री कुंदनप्रभा जी का चातुर्मासिक मंगल प्रवेश
चार महीने का होगा चतुर्मास ! ज्ञान, जप, तप एवं स्वाध्याय की होगी आरधना

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग
जसोल :- आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदुषी शिष्या साध्वी श्री कुंदनप्रभा जी आदि ठाणा चार का चातुर्मास मंगल प्रवेश गुरुवार को श्रद्धा, भक्ति एवं धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ।
जसोल नगर के नाकोड़ा रोड़ स्तिथ महाप्रज्ञ विला से भगवान पैलेस, नया ओसवाल भवन, राजा चौक, अहिंसा सर्कल होते हुए पुराणा ओसवाल भवन में प्रातः 7.21बजे चातुर्मासिक मंगल प्रवेश हुआ। रास्ते मे जयघोष, मंगल गीत एवं धार्मिक नारो से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
प्रथम दिन मंगल प्रवचन में साध्वी श्री कुंदनप्रभा जी ने कहा कि चातुर्मास आत्मशुद्धि, संयम, तप,स्वाध्याय और धर्म आराधना का अमूल्य अवसर है। उन्होंने श्रावक – श्राविकाओं से चातुर्मास के दौरान अधिकाधिक धर्म, साधना, सामायिक, प्रतिक्रमण, तप एवं सेवा कार्यो से जुड़कर आध्यत्मिक उन्नति का लाभ लेने का आह्वान किया। कार्यक्रम में साध्वी श्री विद्युत प्रभा, साध्वी श्री किरण यशा, साध्वी श्री चारित्र प्रभा ने भी धर्मोपदेश देते हुये धर्म, संयम व सदाचार का संदेश दिया। साथ ही सामूहिक साध्वीवृन्द द्वारा “महाश्रमण मॉल” की सुंदर प्रस्तुति दी।
इससे पूर्व तेरापन्थ महिला मंडल द्वारा स्वागत गीतिका की प्रस्तुति दी गई। इस अवसर पर तेरापन्थ सभा अध्यक्ष गौतमचन्द ढ़ेलडिया, महासभा से गौतमचन्द सालेचा, ज्ञानशाला प्रभारी डूंगरचन्द सालेचा, उपासक सुरेंद्र बी. सालेचा, महिला मंडल अध्यक्ष ममता मेहता, अणुव्रत समिति अध्यक्ष महावीर सालेचा, संपतराज चौपड़ा, सुरेश डोसी, जितेंद्र जे.सालेचा, कुमारपाल संकलेचा, तेयुप अध्यक्ष भरत बोकड़िया, पुष्पादेवी बुरड़, आस्था सालेचा सहित प्रबुद्ध वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किये। सभी ने चातुर्मास में अधिक से अधिक संख्या में उपस्तिथ होकर धर्मलाभ लेने की अपील की। कार्यक्रम का सफल संचालन मंत्री माणकचन्द संकलेचा ने किया। इस अवसर पर तेरापंथ सभा, तेरापंथ युवक परिषद, तेरापंथ महिला मंडल, अणुव्रत समिति, कन्या मंडल, किशोर मंडल, ज्ञानशाला सहित सभी संस्थाओं के सदस्य उपास्तिथ थे।

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