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घुटनों के ऑस्टियोआर्थराइटिस में जीएफसी उपचार से मिली राहत, प्रोफेसर शिव कुमार भनोट ने साझा किया अनुभव

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी

 

बीकानेर। महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर के इतिहास विभाग के सेवानिवृत्त प्रोफेसर एवं पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर शिव कुमार भनोट ने घुटनों के ऑस्टियोआर्थराइटिस के उपचार में जीएफसी (ग्रोथ फैक्टर कॉन्सेंट्रेट) थेरेपी से मिले सकारात्मक परिणामों को साझा किया है। उन्होंने 5 अप्रैल 2026 को लिखे अपने पत्र में इस उपचार को प्रभावी बताते हुए अपने व्यक्तिगत अनुभव का उल्लेख किया।

प्रोफेसर भनोट लंबे समय से दोनों घुटनों के गंभीर ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित थे। बढ़ते दर्द के कारण उन्हें घुटना प्रत्यारोपण (नी रिप्लेसमेंट) सर्जरी कराने की सलाह दी गई थी। इसी बीच उनका उपचार बीकानेर के पीबीएम अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर स्थित ऑर्थो-बायोलॉजिकल रीजनरेटिव केयर लैब (ओबीआरसीएल) में किया गया।

जानकारी के अनुसार वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय कपूर ने 24 मार्च 2026 को उनका जीएफसी उपचार किया। उपचार के मात्र 10 दिनों के भीतर प्रोफेसर भनोट ने लगभग 20 प्रतिशत सुधार महसूस करने की बात कही। उन्होंने बताया कि पूरी प्रक्रिया दर्दरहित रही तथा उपचार के बाद किसी प्रकार की सूजन या अन्य दुष्प्रभाव नहीं हुए।

प्रोफेसर भनोट ने विशेष रूप से इस बात का उल्लेख किया कि यह उपचार उन्हें निःशुल्क उपलब्ध कराया गया। उन्होंने इसे गरीब एवं जरूरतमंद मरीजों के लिए एक वरदान बताया और कहा कि इस प्रकार की आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं आम लोगों के लिए राहत का माध्यम बन सकती हैं।

राज्य का पहला अत्याधुनिक ऑर्थो-बायोलॉजिकल रीजनरेटिव केयर क्लिनिक

पीबीएम अस्पताल में स्थापित ओबीआरसी लैब को राज्य का पहला अत्याधुनिक ऑर्थो-बायोलॉजिकल रीजनरेटिव केयर क्लिनिक माना जाता है। यह प्रयोगशाला मुख्य रूप से जोड़ों के दर्द और हड्डियों के शुरुआती क्षरण, विशेषकर ग्रेड-1 और ग्रेड-2 ऑस्टियोआर्थराइटिस के उपचार पर केंद्रित है।

इस तकनीक में मरीज के स्वयं के रक्त एवं अस्थि मज्जा (बोन मैरो) से विकास कारकों (ग्रोथ फैक्टर्स) को अलग कर प्रभावित जोड़ों में उपयोग किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे ऊतकों के पुनर्निर्माण में सहायता मिल सकती है तथा कई मामलों में सर्जरी की आवश्यकता को टाला जा सकता है।

चूंकि इस उपचार में रोगी की अपनी जैविक सामग्री का उपयोग किया जाता है, इसलिए इसके दुष्प्रभावों की संभावना बहुत कम मानी जाती है।

महत्वपूर्ण सूचना

यह जानकारी एक मरीज के व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है और केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की जा रही है। इसे किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह, निदान या उपचार की अनुशंसा नहीं माना जाना चाहिए। घुटनों के दर्द या ऑस्टियोआर्थराइटिस के पीछे रुमेटॉइड गठिया, लिगामेंट की चोट, संक्रमण अथवा अन्य चिकित्सीय कारण भी हो सकते हैं। ऐसे मामलों में विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है।

विशेषज्ञों के अनुसार ऑस्टियोआर्थराइटिस के उपचार में फिजियोथेरेपी, जीवनशैली में सुधार, दवा प्रबंधन (एनएसएआईडी) तथा अन्य आधुनिक उपचार विकल्प भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Dr Ram Dayal Bhati

Editor Rajasthan Mobile Number 97848 14914

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