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नाबार्ड प्रायोजित एल.ई.डी.पी. के अंतर्गत बीकानेर के रायसर में बकरी पालन पर रिफ्रेशर प्रशिक्षण सत्र का आयोजन

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी
बीकानेर। जिले की रायसर ग्राम पंचायत में सोमवार 22 जून को श्री गुरु जम्भेश्वर सेवा संस्थान (एसजीजेएसएस) द्वारा नाबार्ड प्रायोजित आजीविका एवं उद्यम विकास कार्यक्रम (एलईडीपी) के अंतर्गत बकरी पालन पर एक रिफ्रेशर (पुनश्चर्या) प्रशिक्षण सत्र का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस सत्र का उद्देश्य पूर्व में प्रशिक्षित बकरी पालक महिलाओं को उन्नत एवं वैज्ञानिक पशुपालन तकनीकों का पुनः स्मरण कराना तथा उनके व्यावहारिक अनुभवों के आधार पर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करना रहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आशीष चोपड़ा एवं डॉ. अशोक कुमार यादव उपस्थित रहे। दोनों विशेषज्ञों ने अपने गहन तकनीकी ज्ञान एवं अनुभव के माध्यम से प्रशिक्षणार्थी महिलाओं को बकरी पालन की आधुनिक विधियों से अवगत कराया। इस अवसर पर प्रशिक्षणार्थियों का प्रतिनिधित्व श्रीमती कृष्णा रामावत ने किया, जबकि श्री गुरु जम्भेश्वर सेवा संस्थान की ओर से सद्दाम ने कार्यक्रम के संचालन एवं समन्वय में सहभागिता निभाई। यह एलईडीपी कार्यक्रम नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक अरविन्द कुमार चाहर के मार्गदर्शन एवं देख-रेख में संचालित किया जा रहा है।
रिफ्रेशर प्रशिक्षण सत्र विशेष रूप से उन महिला बकरी पालकों के लिए आयोजित किया गया, जिन्होंने पूर्व में संस्थान द्वारा संचालित बकरी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया था। इस पुनश्चर्या सत्र का मूल उद्देश्य प्रशिक्षण के दौरान सिखाई गई तकनीकों को सुदृढ़ करना तथा क्षेत्र में कार्य करते समय महिलाओं के समक्ष आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करना था। बीकानेर जैसे शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्र में बकरी पालन ग्रामीण परिवारों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण एवं अपेक्षाकृत कम लागत वाला साधन है, और इसमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने से उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
सत्र के दौरान प्रशिक्षणार्थी महिलाओं को बकरियों के उन्नत नस्ल चयन, संतुलित आहार एवं पोषण प्रबंधन, ऋतु के अनुसार देखभाल, प्रजनन प्रबंधन, तथा बकरियों में होने वाले सामान्य रोगों की पहचान, रोकथाम एवं समयबद्ध टीकाकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। विशेषज्ञों ने इस बात पर विशेष बल दिया कि स्वच्छ एवं उपयुक्त आवास, शुद्ध पेयजल तथा नियमित स्वास्थ्य जाँच से बकरियों की मृत्यु-दर में कमी आती है और उनकी उत्पादकता बढ़ती है।
प्रशिक्षण में महिलाओं को बकरी पालन को एक व्यवस्थित सूक्ष्म-उद्यम के रूप में विकसित करने हेतु भी प्रेरित किया गया। उन्हें उत्पादों के विपणन, स्वयं सहायता समूह के माध्यम से सामूहिक कार्य, अभिलेख-संधारण तथा बैंक एवं वित्तीय संस्थाओं से जुड़ाव के महत्व के बारे में बताया गया, ताकि वे अपने बकरी पालन व्यवसाय को दीर्घकालिक एवं लाभकारी आधार पर संचालित कर सकें।
विशेषज्ञों का संबोधन
मुख्य अतिथि डॉ. आशीष चोपड़ा, वरिष्ठ वैज्ञानिक ने अपने संबोधन में कहा कि बकरी पालन ग्रामीण राजस्थान की जलवायु एवं भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल एक अत्यंत उपयोगी आजीविका है। उन्होंने महिलाओं को बकरियों के पोषण एवं रोग-प्रबंधन की वैज्ञानिक विधियों को अपनाने का परामर्श दिया तथा यह स्पष्ट किया कि छोटे-छोटे सुधारों — जैसे उचित आहार, समय पर टीकाकरण एवं स्वच्छ आवास — से उत्पादन में बड़ा अंतर आ सकता है। उन्होंने महिलाओं की व्यावहारिक समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना और उनके निराकरण हेतु सुझाव प्रस्तुत किए।
डॉ. अशोक कुमार यादव, वरिष्ठ वैज्ञानिक ने प्रजनन प्रबंधन एवं नस्ल सुधार पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि उन्नत नस्ल के चयन एवं उचित प्रजनन प्रबंधन से बकरियों की गुणवत्ता एवं बाज़ार मूल्य दोनों में वृद्धि होती है। उन्होंने महिलाओं को बकरियों के स्वास्थ्य संबंधी नियमित निगरानी रखने तथा किसी भी रोग के प्रारंभिक लक्षण दिखाई देने पर तत्काल पशु चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी। उन्होंने यह भी कहा कि जैसे अनुसंधान संस्थान सदैव ग्रामीण पशुपालकों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करने हेतु तत्पर हैं।
कार्यक्रम में प्रशिक्षणार्थियों का प्रतिनिधित्व करते हुए श्रीमती कृष्णा रामावत ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि संस्थान द्वारा संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों से उन्हें एवं अन्य महिलाओं को बकरी पालन को एक सुनियोजित ढंग से करने में महत्वपूर्ण सहायता मिली है। उन्होंने इस रिफ्रेशर सत्र के लिए संस्थान एवं नाबार्ड के प्रति आभार व्यक्त किया तथा कहा कि इस प्रकार के पुनश्चर्या सत्र महिलाओं के आत्मविश्वास एवं कौशल को और अधिक सुदृढ़ करते हैं।
श्री गुरु जम्भेश्वर सेवा संस्थान की ओर से सद्दाम ने सभी अतिथियों एवं प्रशिक्षणार्थी महिलाओं का स्वागत किया तथा सत्र के सुचारु संचालन में समन्वय की भूमिका निभाई। उन्होंने उपस्थित जनों को संस्थान की कार्यप्रणाली एवं नाबार्ड एलईडीपी कार्यक्रम के उद्देश्यों से अवगत कराते हुए बताया कि संस्थान प्रशिक्षण की औपचारिक समाप्ति के पश्चात भी महिलाओं को निरंतर मार्गदर्शन एवं अनुवर्ती सहयोग प्रदान करने हेतु प्रतिबद्ध है।

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