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बंगाल की जीत में बीकानेर के युवा का मौन समर्पण, देव किशन मारू बने प्रेरणा स्रोत

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी
बीकानेर। पश्चिम बंगाल चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की जीत के पीछे कई कार्यकर्ताओं की मेहनत रही, लेकिन बीकानेर के युवा नेता देव किशन मारू का योगदान खास चर्चा में है। गंगाशहर की पावन धरती पर जन्मे देव किशन मारू ने संगठन के लिए मौन समर्पण और निरंतर परिश्रम का उदाहरण प्रस्तुत किया है।
साधारण शिक्षक परिवार से आने वाले देव किशन मारू ने अपनी मेहनत, अनुशासन और राष्ट्र सेवा की भावना के बल पर अलग पहचान बनाई। उनकी प्रारंभिक शिक्षा आदर्श विद्या मंदिर, गंगाशहर से हुई, जहां से उनके जीवन में संस्कार और सेवा भाव की नींव पड़ी।
उच्च शिक्षा में उन्होंने बीसीए, एलएलबी और एमएससी जैसी डिग्रियां प्राप्त कीं। साथ ही संघ शिक्षा के अंतर्गत आईटीसी प्रशिक्षण भी लिया। छात्र जीवन से ही वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े और संगठनात्मक जिम्मेदारियों का सफल निर्वहन किया।
इसके बाद उन्होंने भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) में सक्रिय भूमिका निभाई। मंडल महामंत्री, श्रीगंगानगर जिला प्रभारी, प्रदेश मॉनिटरिंग कमेटी सदस्य और राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए उन्होंने संगठन को मजबूती दी।
देव किशन मारू ने देश के कई राज्यों में चुनावी जिम्मेदारियां संभालीं। उत्तर प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, दिल्ली और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में सह प्रभारी के रूप में उन्होंने कार्य किया।
विशेष रूप से पश्चिम बंगाल चुनाव में वे लगातार चार महीने तक प्रवास पर रहे और अंतिम मतदाता तक सीधा संपर्क साधा। चुनाव परिणाम आने के बाद भी उनकी सहजता और समर्पण में कोई कमी नहीं आई।
स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रेरित देव किशन मारू मौन साधक की तरह संगठन के लिए कार्य करते हैं। उनका जीवन युवा राजनेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है।

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