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महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर वसुंधरा राजे का बड़ा सवाल, मोहन भागवत को लिखा पत्र

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी

 

जयपुर,

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत को एक पत्र लिखकर गंभीर चिंताएं जताई हैं। इस पत्र में उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए महिला आरक्षण बिल को परिसीमन से जोड़ने के फैसले को संदेहास्पद बताया है।

राजे ने अपने पत्र में कहा कि एक ओर देश में महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी देने की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर इसे परिसीमन जैसी जटिल प्रक्रिया से जोड़ना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने पूछा कि यदि सरकार की नीयत साफ है, तो महिला आरक्षण सीधे और स्पष्ट तरीके से क्यों लागू नहीं किया जा रहा।

उन्होंने आशंका जताई कि परिसीमन के जरिए राजनीतिक संतुलन को प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है। पत्र में तीन प्रमुख चिंताएं व्यक्त की गई हैं—

पहला, उन राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रयास, जहां सत्तारूढ़ दल का जनाधार मजबूत है।

दूसरा, विपक्षी वोटों को इस तरह विभाजित करना कि वे चुनाव परिणामों को प्रभावित न कर सकें।

तीसरा, पुराने आंकड़ों के आधार पर परिसीमन लागू कर एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों के प्रतिनिधित्व को प्रभावित करना।

राजे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि संघ को देश के नैतिक मार्गदर्शक के रूप में देखा जाता है, ऐसे में इस मुद्दे पर उसकी चुप्पी चिंता का विषय है। उन्होंने भागवत से इस विषय पर स्पष्ट रुख अपनाने और हस्तक्षेप करने की अपील की।

पत्र में उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में भारतीय जनता पार्टी की छवि संस्कार और राष्ट्रधर्म से हटकर सत्ता-लोभ और राजनीतिक रणनीतियों से जुड़ती नजर आ रही है, जो चिंताजनक है।

अंत में वसुंधरा राजे ने उम्मीद जताई कि इस मुद्दे को केवल राजनीतिक प्रतिक्रिया न मानकर एक गंभीर वैचारिक चेतावनी के रूप में लिया जाएगा और लोकतंत्र व सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

 

Dr Ram Dayal Bhati

Editor Rajasthan Mobile Number 97848 14914

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