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रिफाइनरी के बीच प्यासा पचपदरा: खारे पानी से चल रहा गुजारा, मीठा पानी महीने में दो बार
चुनाव में वादे बड़े-बड़े, हकीकत में मीठे पानी को तरस रहा पचपदरा* *विकास के दावों के बीच पचपदरा में मीठे पानी की किल्लत बरकरार*

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग
पचपदरा । देश की सबसे बड़ी रिफाइनरी के लिए चर्चित पचपदरा कस्बे में आज भी लोग पीने के मीठे पानी के लिए तरस रहे हैं। शहर में जलदाय विभाग की अनियमित जलापूर्ति के कारण आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि शहर में खारे पानी की सप्लाई करीब पांच दिन के अंतराल में की जाती है, जबकि मीठा पानी पूरे महीने में केवल दो बार ही मिल पाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि खारे पानी से न तो पीने की जरूरत पूरी होती है और न ही घरेलू उपयोग सही तरीके से हो पाता है। मजबूरी में लोग इसी पानी से काम चला रहे हैं या फिर महंगे दामों पर टैंकरों से पानी मंगवाने को मजबूर हैं।
पचपदरा को लेकर अक्सर कहा जाता है कि यहां स्थापित हो रही देश की सबसे बड़ी रिफाइनरी इस क्षेत्र की तस्वीर बदल देगी और इसे भविष्य का “दुबई” बना देगी। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आती है। जिस कस्बे को औद्योगिक विकास का केंद्र बताया जा रहा है, वहां आज भी लोगों को मूलभूत सुविधाएं तक सही ढंग से उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।
रिफाइनरी में काम करने वाले हजारों मजदूर पचपदरा और मडापुरा में रहकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। इन परिवारों को भी पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। मीठे पानी की कमी के कारण लोगों को कई तरह की दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं, जिससे क्षेत्र में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर विधानसभा चुनाव के समय जनप्रतिनिधि मीठे पानी की नियमित सप्लाई और शहर के विकास को लेकर बड़े-बड़े वादे करते हैं। चुनाव खत्म होते ही ये वादे भी भुला दिए जाते हैं। वर्षों से पचपदरा के लोग विकास और सुविधाओं के इंतजार में बैठे हैं, लेकिन स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हो पाया है।
अब लोगों की मांग है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता देते हुए पचपदरा में मीठे पानी की नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करें। यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
जनता की मांग
स्थानीय लोगों ने सरकार और जलदाय विभाग से मांग की है कि पचपदरा में स्थायी समाधान के लिए नई पेयजल योजना लागू की जाए, ताकि शहर के साथ-साथ आसपास के गांवों को भी मीठे पानी की नियमित सुविधा मिल सके। तभी पचपदरा का विकास वास्तव में सार्थक माना जाएगा।

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