रचना: अंजली पाण्डेय नसीब से बढ़कर जहाँ में कहाँ कुछ भी होता है, हसरतों के आगे सदा खड़ा नसीब होता है। ज़िंदगी की जंग में वही विजयी होता है, साथ में जिसके उसका नसीब होता है। हज़ारों की भीड़ पर जो अकेला ही भारी हो, तारीफ़ के क़ाबिल जहाँ में जिसकी यारी हो। दया हो जिसमें और समझदारी हो, बेबसों पर जिसकी मेहरबानी हो। लोग रखते हैं याद उसे, जो दिल का अमीर होता है, साथ में जिसके उसका नसीब होता है। नसीब से बढ़कर जहाँ में कहाँ कुछ भी होता है, हसरतों से आगे सदा खड़ा नसीब होता है। वो लोग जो सजदे में अपना सर झुकाते हैं, दिन-रात खुदाई कर जो खुदा को मनाते हैं। उनके हृदय की लाचारी चिल्ला कर कहती है— क्या मूर्ख हैं ये लोग, जो पत्थर से आस लगाते हैं। उम्मीदों का अंजाम सदा फ़रेब होता है, नसीब से बढ़कर जहाँ में कहाँ कुछ भी होता है। हसरतों के आगे सदा खड़ा नसीब होता है, ज़िंदगी की जंग में वही विजयी होता है, साथ में जिसके उसका नसीब होता है।
रचना: अंजली पाण्डेय नसीब से बढ़कर जहाँ में कहाँ कुछ भी होता है, हसरतों के आगे सदा खड़ा नसीब होता है। ज़िंदगी की जंग में वही विजयी होता है, साथ में जिसके उसका नसीब होता है। हज़ारों की भीड़ पर जो अकेला ही भारी हो, तारीफ़ के क़ाबिल जहाँ में जिसकी यारी हो। दया हो जिसमें और समझदारी हो, बेबसों पर जिसकी मेहरबानी हो। लोग रखते हैं याद उसे, जो दिल का अमीर होता है, साथ में जिसके उसका नसीब होता है। नसीब से बढ़कर जहाँ में कहाँ कुछ भी होता है, हसरतों से आगे सदा खड़ा नसीब होता है। वो लोग जो सजदे में अपना सर झुकाते हैं, दिन-रात खुदाई कर जो खुदा को मनाते हैं। उनके हृदय की लाचारी चिल्ला कर कहती है— क्या मूर्ख हैं ये लोग, जो पत्थर से आस लगाते हैं। उम्मीदों का अंजाम सदा फ़रेब होता है, नसीब से बढ़कर जहाँ में कहाँ कुछ भी होता है। हसरतों के आगे सदा खड़ा नसीब होता है, ज़िंदगी की जंग में वही विजयी होता है, साथ में जिसके उसका नसीब होता है।