उत्तर प्रदेशदेशधर्मबस्तीब्रेकिंग न्यूज़स्वास्थ्य
भगवान धन्वंतरि ने आयुर्वेद के माध्यम से मानवता को दिया स्वस्थ जीवन का संदेश : प्रो. डॉ. नवीन सिंह
धन्वंतरि दिवस पर दिव्यम योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान में विचार गोष्ठी आयोजित, आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के महत्व पर हुई चर्चा

बस्ती से वेदान्त सिंह
बस्ती। धन्वंतरि दिवस के पावन अवसर पर पंडित राजन महिला डिग्री कॉलेज स्थित दिव्यम योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी के मुख्य वक्ता प्रोफेसर डॉ. नवीन सिंह ने भगवान धन्वंतरि के जीवन, व्यक्तित्व, विशेषताओं तथा आयुर्वेद के क्षेत्र में उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का प्रवर्तक एवं देवताओं का वैद्य माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान वे अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि स्वास्थ्य, आरोग्य और दीर्घायु के प्रतीक हैं। उनका प्राकट्य दिवस हमें स्वस्थ एवं निरोग जीवन के महत्व का संदेश देता है।
प्रो. डॉ. नवीन सिंह ने कहा कि आयुर्वेद केवल रोगों के उपचार की चिकित्सा पद्धति नहीं है, बल्कि यह स्वस्थ जीवनशैली, रोगों से बचाव तथा शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का संपूर्ण विज्ञान है। वर्तमान समय में अनियमित दिनचर्या, असंतुलित खानपान और मानसिक तनाव के बीच आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा एवं एक्यूप्रेशर की उपयोगिता और भी बढ़ गई है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी दिनचर्या में स्वास्थ्यवर्धक आदतों को शामिल करना चाहिए।
दिव्यम योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान की संचालिका योगाचार्य सन्नो दुबे ने भगवान धन्वंतरि के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि भारतीय चिकित्सा परंपरा हमारी अमूल्य धरोहर है। आयुर्वेद और योग के सिद्धांतों को अपनाकर समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सकती है।
योगाचार्य राम मोहन पाल ने कहा कि नियमित योगाभ्यास, प्राणायाम, संतुलित आहार और सकारात्मक विचारों को अपनाकर व्यक्ति अपने स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल कर सकता है। स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को जन-जन तक पहुंचाना आवश्यक है।
योगाचार्य वेदांत सिंह ने कहा कि भगवान धन्वंतरि का संदेश मानव जीवन में स्वास्थ्य, सेवा और समर्पण की भावना को मजबूत करता है।
कार्यक्रम के अंत में आयुर्वेद एवं भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के संरक्षण, संवर्धन और जनजागरूकता के लिए सामूहिक संकल्प लिया गया।

Subscribe to my channel


