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दीपावली पर पटाखों से बनाएं दूरी, जरूरतमंदों के बीच खुशियां बांटकर मनाएं पर्व : ओम बांठिया
भारत जैन महामंडल के अध्यक्ष ओम बांठिया ने की पर्यावरण संरक्षण की अपील, कहा—मिट्टी के दीपक जलाकर प्रेम, मैत्री और सद्भाव का संदेश दें

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग
बालोतरा, राजस्थान। दीपावली के पावन पर्व को हर्षोल्लास, प्रेम और सद्भाव के साथ मनाने तथा जरूरतमंद परिवारों के बीच खुशियां बांटने की अपील भारत जैन महामंडल के अध्यक्ष ओम बांठिया ने आम नागरिकों से की है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए पटाखों से दूरी बनाने और मिट्टी के दीपक जलाकर भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।
ओम बांठिया ने कहा कि दीपावली का पर्व भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण कल्याणक, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन और माता महालक्ष्मी के पावन पूजन से जुड़ा हुआ है। इस अवसर पर प्रत्येक व्यक्ति को अपने घरों में मिट्टी के दीपक जलाकर प्रकाश फैलाने के साथ-साथ दूसरों के जीवन में भी खुशियों का उजाला करना चाहिए।
जरूरतमंद परिवारों के बीच बांटें दीपावली की खुशियां
उन्होंने कहा कि दीपावली का वास्तविक आनंद तभी है, जब समाज का प्रत्येक वर्ग इस पर्व की खुशियों में सहभागी बने। विशेष रूप से असहाय एवं जरूरतमंद परिवारों को मिठाइयां, कपड़े और आवश्यक सामग्री प्रदान कर उनके घरों में भी खुशी का वातावरण बनाने का प्रयास करना चाहिए।
बांठिया ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि दीपावली पर पटाखे नहीं जलाकर पर्यावरण की सुरक्षा में सहयोग दें। जीवन में ज्ञान के दीपक जलाएं तथा मैत्री की बाती से आपसी स्नेह और सद्भाव की ज्योति को आगे बढ़ाएं। यही भारतीय संस्कृति और परंपरा का मूल संदेश है।
जैन धर्म में दीपावली का विशेष आध्यात्मिक महत्व
ओम बांठिया ने बताया कि जैन धर्म की दृष्टि से दीपावली का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। यह पर्व भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण कल्याणक तथा प्रथम गणधर गौतम स्वामी के केवलज्ञान प्राप्ति के पावन प्रसंग से जुड़ा हुआ है। इस अवसर पर तप, त्याग, संयम और आत्मआराधना का विशेष महत्व रहता है।
उन्होंने कहा कि दीपावली केवल घरों को रोशन करने का पर्व नहीं, बल्कि मन में प्रेम, करुणा, मैत्री और सेवा की भावना जागृत करने का भी अवसर है।
सर्वे भवन्तु सुखिनः का संदेश अपनाने का आह्वान
अंत में ओम बांठिया ने सभी नागरिकों को दीपावली की मंगलकामनाएं देते हुए कहा कि आइए, इस पावन पर्व पर एक-दूसरे को प्रेमपूर्वक बधाई दें और सभी के सुखद एवं मंगलमय भविष्य की कामना करें।
उन्होंने ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः’ का संदेश देते हुए भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और मानव सेवा की परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

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