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एनआरसीसी में महिला किसान दिवस पर ऊँटनी के दूध की मूल्य संवर्धन विधियां एवं नवाचारों से महिला किसानों को जोड़ने की पहल

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी
बीकानेर, 15 अक्टूबर 2026। भाकृअनुप–राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (एनआरसीसी), बीकानेर में आज राष्ट्रीय महिला किसान दिवस के अवसर पर कृषक-वैज्ञानिक संवाद एवं विभिन्न जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया। इस दौरान बीकानेर जिले के जोड़बीड़ ग्रामीण क्षेत्र की 32 महिला किसानों तथा कुल 39 किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के अंतर्गत महिला किसानों को केंद्र की विभिन्न इकाइयों यथा- उष्ट्र डेयरी, उष्ट्र डेयरी प्रौद्योगिकी एवं प्रसंस्करण इकाई, उष्ट्र बाड़ों तथा उष्ट्र संग्रहालय का भ्रमण करवाया गया तथा विषय विशेषज्ञ वैज्ञानिकों द्वारा उन्हें उष्ट्रपालन, स्वच्छ दूध उत्पादन, ऊँटनी के दूध से मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्माण, चारा उत्पादन तथा ऊँटों के स्वास्थ्य एवं प्रबंधन से संबंधित उपयोगी जानकारी प्रदान की गई।
केंद्र के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने वैज्ञानिकों के माध्यम से अपना संदेश देते हुए कहा कि कृषि एवं पशुधन प्रबंधन के क्षेत्र में महिला किसानों का योगदान ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का आधार है। महिलाओं को वैज्ञानिक तकनीकों एवं आधुनिक ज्ञान से जोड़कर न केवल उनकी आजीविका को सुदृढ़ किया जा सकता है, बल्कि परिवार और समाज की आर्थिक समृद्धि को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि महिला किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एनआरसीसी वैज्ञानिक जानकारी एवं तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
केंद्र की वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. बसंती ज्योत्सना ने बताया कि कार्यक्रम का आयोजन ‘समृद्ध राष्ट्र के लिए महिला किसानों का सशक्तीकरण’ विषय के अंतर्गत किया गया। इसका उद्देश्य पशुपालन व्यवसाय में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्हें वैज्ञानिक जानकारी एवं तकनीकी नवाचारों से जोड़ना तथा उनकी आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देना रहा। इस दौरान ऊँटनी के दूध से विविध मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने की संभावनाओं ने उनका विशेष ध्यान आकर्षित किया। इस गतिविधि का उद्देश्य उन्हें ऊँटनी के दूध के बेहतर उपयोग तथा इससे आय के नए अवसर विकसित करने के प्रति प्रोत्साहित करना रहा।
केंद्र की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रियंका गौतम ने चरागाह इकाई (जीएफयू) के भ्रमण के दौरान महिला किसानों को केंद्र के कृषि क्षेत्र में उगाई जा रही विभिन्न फसलों एवं चारा उत्पादन संबंधी गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने महिला किसानों द्वारा हरे चारे के उत्पादन एवं पशुओं के लिए चारा प्रबंधन से जुड़े पूछे गए प्रश्नों का वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समाधान बताया तथा उन्हें उपयोगी सुझाव दिए गए।
केंद्र की डेयरी प्रौद्योगिकी एवं प्रसंस्करण इकाई में वैज्ञानिक डॉ. मितुल कुमार ने ऊँटनी के दूध से तैयार किए जाने वाले विभिन्न दुग्ध उत्पादों का प्रदर्शन किया। उन्हें ऊँटनी के दूध के गुणधर्मों एवं इसके उपयोग से तैयार होने वाले उत्पादों की जानकारी देने के साथ स्वच्छ दूध उत्पादन के वैज्ञानिक तरीकों से भी अवगत करवाया गया। केंद्र की वैज्ञानिकों डॉ. स्वागतिका प्रियदर्शिनी एवं डॉ. अरुणा कुनियाल ने पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के रूप में ऊँटों के स्वास्थ्य, रोगों से बचाव एवं उचित प्रबंधन से संबंधित जानकारी प्रदान की। संवाद कार्यक्रम में महिला पशुपालकों ने पशुपालन व्यवसाय में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों एवं समस्याओं को भी साझा किया। वैज्ञानिकों ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य एवं प्रबंधन के लिए आवश्यक सुझाव दिए।

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