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तेरापंथ भवन में साध्वी श्री मंगलप्रज्ञाजी से मिले ललित के. पंवार, धर्म और प्रेक्षा ध्यान पर हुई चर्चा
धर्म, प्रेक्षा ध्यान एवं जैन विश्व भारती लाडनूं के विभिन्न विषयों पर हुआ विचार-विमर्श

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग
तेरापंथ भवन में साध्वी श्री प्रोफेसर डॉ. मंगलप्रज्ञाजी के दर्शनार्थ राजस्थान सरकार की राज्य प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन सलाहकार समिति के अध्यक्ष एवं विवेकानंद ग्लोबल विश्वविद्यालय, जयपुर के चांसलर श्री ललित के. पंवार सा. पहुंचे। इस अवसर पर अनुव्रत सेवी श्री ओमजी बांठिया सहित तेरापंथ समाज के पदाधिकारी एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।
साध्वी श्री मंगलप्रज्ञाजी एवं श्री ललित के. पंवार के बीच धर्म, प्रेक्षा ध्यान तथा जैन विश्व भारती, लाडनूं से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। बातचीत के दौरान प्रेक्षा ध्यान को शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने तथा विद्यालयों में इसके पाठ्यक्रम को प्रारंभ किए जाने की आवश्यकता पर भी विचार-विमर्श किया गया।
इस अवसर पर साध्वी श्री मंगलप्रज्ञाजी ने प्रेक्षा ध्यान एवं जैन धर्म के प्रचार-प्रसार के अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे लगभग 34-35 बार विदेश यात्राएं कर चुकी हैं। उन्होंने विदेशों में जैन धर्म एवं प्रेक्षा ध्यान के संबंध में लोगों को जानकारी देने का कार्य किया। साध्वी श्रीजी के अनुसार, लगभग 6000 विदेशी सदस्यों को जैन धर्म और प्रेक्षा ध्यान की जानकारी प्रदान की गई है।
श्री ललित के. पंवार ने कहा कि उनका परिवार आचार्य श्री तुलसी के समय से ही तेरापंथ धर्मसंघ से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि वे आचार्य श्री महाप्रज्ञजी एवं आचार्य श्री महाश्रमणजी के भी समय-समय पर दर्शन करते रहे हैं। उन्होंने तेरापंथ धर्मसंघ से अपने परिवार के लंबे जुड़ाव को श्रद्धा एवं आस्था के साथ स्मरण किया।
साध्वी श्री मंगलप्रज्ञाजी ने कहा कि प्रेक्षा ध्यान विद्यार्थियों के मानसिक विकास, एकाग्रता एवं सकारात्मक सोच के लिए उपयोगी हो सकता है। विद्यालयों में प्रेक्षा ध्यान से संबंधित पाठ्यक्रम शुरू करने की दिशा में प्रयास किए जाने की आवश्यकता पर उन्होंने जोर दिया।
कार्यक्रम में तेरापंथ सभा अध्यक्ष श्री राणमलजी, उपाध्यक्ष श्री प्रकाशजी बालड, मंत्री श्री मोहन बाफना, सहमंत्री श्री राजेश बाफना, संगठन मंत्री श्री महेंद्रजी गांधी मेहता सहित समाज के अन्य सदस्य एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।
इस दौरान सभी ने धर्म, आध्यात्मिकता, प्रेक्षा ध्यान तथा समाज में इसके व्यापक प्रचार-प्रसार को लेकर विचार साझा किए।

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