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मासूम को न्याय दिलाने की मिसाल: पुलिस अधिकारी धीरेंद्र शेखावत की 5 साल लंबी लड़ाई रंग लाई

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी
बीकानेर। पुलिस की वर्दी केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने का प्रतीक नहीं है, बल्कि न्याय और मानवता की जिम्मेदारी भी निभाती है। इसका एक प्रेरणादायक उदाहरण पुलिस अधिकारी धीरेंद्र शेखावत ने पेश किया, जिन्होंने एक मासूम बच्ची को न्याय दिलाने के लिए वर्षों तक संघर्ष किया।
20 मार्च 2016 को बीछवाल थाना क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी छोटूराम ने लगभग दो वर्षीय मासूम बच्ची का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म किया और उसे जंगल में गंभीर हालत में छोड़कर फरार हो गया। सूचना मिलते ही तत्कालीन पुलिस अधिकारी धीरेंद्र शेखावत अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। बच्ची की हालत देखकर सभी स्तब्ध रह गए। चिकित्सकीय जांच में दुष्कर्म की पुष्टि होने के बाद बच्ची को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पुलिस ने बच्ची के परिजनों की तलाश शुरू की और काफी प्रयासों के बाद उसकी मां को खोज निकाला। हालांकि सामाजिक दबाव और अन्य कारणों से परिवार ने एफआईआर दर्ज कराने से इनकार कर दिया। ऐसे में धीरेंद्र शेखावत ने साहसिक कदम उठाते हुए स्वयं बच्ची के अभिभावक की भूमिका निभाई और थाने में एफआईआर दर्ज कराकर मामले की जांच शुरू करवाई।
जांच के दौरान आरोपी छोटूराम जाट को गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। अदालत में सुनवाई के दौरान बच्ची के परिवार ने गवाही देने से भी मना कर दिया। इसके बावजूद शेखावत ने हार नहीं मानी और आरोपी के खिलाफ मजबूत साक्ष्य जुटाने में जुटे रहे। कई बार तबादले होने के बावजूद वे समय-समय पर बीकानेर आकर केस की पैरवी करते रहे।
करीब पांच वर्षों तक चले संघर्ष और कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार न्याय की जीत हुई। अदालत ने आरोपी छोटूराम को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
धीरेंद्र शेखावत के अनुसार, यह केवल एक आपराधिक मामला नहीं था, बल्कि एक मासूम बच्ची को न्याय दिलाने का संकल्प था। उनका कहना है कि “खाकी सिर्फ वर्दी नहीं, न्याय और मानवता की जिम्मेदारी भी है।”
यह मामला पुलिस की संवेदनशीलता, दृढ़ इच्छाशक्ति और न्याय के प्रति समर्पण का एक प्रेरक उदाहरण बन गया है।

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