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खैरथल-तिजारा में खाद्य सुरक्षा अभियान का असर: 48 में से 11 नमूने फेल, कारोबारियों पर 9.30 लाख का जुर्माना

ब्यूरो चीफ मुकेश कुमार शर्मा
खैरथल-तिजारा। जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण विभाग द्वारा चलाए जा रहे अभियान में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जनवरी 2026 से मई 2026 के बीच लिए गए 48 खाद्य नमूनों में से 11 नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। जांच में कुछ नमूने असुरक्षित (Unsafe Food) तथा कुछ अवमानक (Sub-standard) पाए गए। वहीं पुराने मामलों में एडीएम कोर्ट द्वारा विभिन्न खाद्य कारोबारियों पर कुल 9 लाख 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अरविंद गेट ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण विभाग द्वारा डॉ. टी. शुभमंगला, आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण विभाग, जयपुर के निर्देशानुसार जिलेभर के विभिन्न प्रतिष्ठानों से खाद्य नमूने लेकर राज्य खाद्य प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे गए थे।
जांच रिपोर्ट के अनुसार भिवाड़ी स्थित हरियाणा पनीर डेयरी, मोर्ईन स्वीट्स (गुर्जर रंजला, मेवात), देव बेकरी (मनसा चौक, भिवाड़ी) तथा टपूकड़ा स्थित आरजे-40 रेस्टोरेंट के पनीर के नमूने असुरक्षित पाए गए। वहीं आरजे-40 रेस्टोरेंट का दही, डी-मार्ट भिवाड़ी की हींग तथा जोधपुर मिष्ठान भंडार खैरथल की मावा मिठाई अवमानक श्रेणी में पाई गई। इसके अलावा अन्य कुछ नमूने भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिले। खाद्य सुरक्षा अधिकारी हेमंत कुमार यादव ने बताया कि विभाग द्वारा पूर्व में दर्ज प्रकरणों की सुनवाई के बाद एडीएम कोर्ट ने विभिन्न प्रतिष्ठानों पर कुल 9.30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इनमें तिजारा, भिवाड़ी, मुंडावर, कोटकासिम, हरसौली और खैरथल क्षेत्र के कई प्रतिष्ठान शामिल हैं। सर्वाधिक एक-एक लाख रुपये की पेनल्टी स्टार रेस्टोरेंट खैरथल, यशी मावा भंडार तिजारा, नारायण दास श्याम दास खैरथल तथा विवेक सैनी तिजारा पर लगाई गई।
विभाग ने स्पष्ट किया कि जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नियमित निरीक्षण, सैंपलिंग और प्रवर्तन कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। खाद्य कारोबारियों को खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करने, स्वच्छता बनाए रखने तथा गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने आमजन से भी अपील की है कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता संबंधी किसी भी शिकायत की सूचना विभाग को दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके और उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सके।

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