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आबदार की पांडुलिपि को मिली राजस्थान साहित्य अकादमी की स्वीकृति

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग
बाड़मेर जिले में जन्मे युवा कवि चंद्रवीर गर्ग “आबदार” के हिंदी भाषा में किवाड़ पर दस्तक काव्य संग्रह की पांडुलिपि को राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर द्वारा प्रकाशन की मिली स्वीकृति । चंद्रवीर गर्ग “आबदार ” की पहली पांडुलिपि है जो हिंदी भाषा में लिखी गई है। जिसे अकादमी ने स्वीकृति दी है, इससे पूर्व कई साहित्य की पत्र – पत्रिकाओं में इनकी कविताएं प्रकाशित हुई है। वर्तमान में आबदार भारतीय दलित साहित्य अकादमी बाड़मेर के जिलाध्यक्ष और रक्तकोष फाउंडेशन के जिला प्रवक्ता डिजिटल साहित्यिक मंच कथन के प्रभारी की जिम्मेदारियों को संभाल रहे हैं।
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. बंशीधर तातेड़ ने आबदार को बधाई देते हुए कहा कि यह खबर बाड़मेर के लिए गौरव का विषय है। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राम कुमार जोशी , हरचंदराम पंवार (सेवानिवृत प्रधानाध्यापक),कवि गौतम “चमन” संखलेचा , कवि जेठानंद पंवार,डॉ. जीत परमार, कैलाश हीराणी ,कवि महेश पन्नू, कवि पारस “जोशीला” ,कवयित्री नीलम जैन, जस्सी जीनगर, वंदना पंवार, मौसमी गर्ग,दमाराम लोहिया , श्यामलाल कोड़ेचा,कवि जगदीशचंद्र सारण , भागीरथ गर्ग, विक्रम गर्ग,जसवंत पुनड़ ,अर्जुन लहुआ , योगेश गर्ग, निखिल गर्ग, विश्वास पंवार, जितेन गर्ग,नरेश,कमलेश , दिनेश कुमार, कपिल, तरुण कुमार सहित कई साहित्य प्रेमियों ने बधाईयां दी ।

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