यूपी में जोरदार ड्रामा चल रहा है । तीर्थराज प्रयागराज में एक सप्ताह तक अपना नंगनाच करने के बाद शंकराचार्य के मेकअप वाले कांग्रेसी गुर्गे उमाशंकर उर्फ अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने दिल की बात उगल ही दी और उसने कहा कि “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री पद से हटा कर केशवप्रसाद मौर्य को उत्तरप्रदेश का मुख्यमंत्री बना देना चाहिए।”
अब खेल कुछ कुछ समझ में आ रहा है। केशवप्रसाद मौर्य भी प्रयागराज का ही रहने वाला है। वहीं से चुनाव भी हार चुका है। यूपी का मुख्यमंत्री बनने के लिए पिछले 8 सालों से लखनऊ से दिल्ली तक राजनीति के सारे हथकंडे अपना चुका है। लेकिन बुरी तरह असफल हुआ है। लखनऊ से दिल्ली तक के दरबारों ने उसके इस सपने को लाल झंडी दिखा दी है, यानि साफ मना कर दिया है। कोढ़ में खाज़ यह कि, यूपी के मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने के लिए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए भी अपना नाम जमकर उड़ावाया लेकिन नतीजा बहुत बुरा निकला, राष्ट्रीय तो छोड़िए प्रदेश अध्यक्ष का पद भी नहीं सौंपा गया।
तो क्या अब केशव बाबू ने कांग्रेसी हथियारों से अपनी लड़ाई लड़ने की ठान ली है… अब यह उनकी लड़ाई है चाहे जैसे लड़ें… हां उनके साथ वाले यह जरूर जान लें कि, केशव का क्या होगा… यह अब खुद केशव को भी नहीं मालूम, क्योंकि उमाशंकरी नौटंकी दिल्ली वालों को भी कतई रास नहीं आयी है।
इधर योगी आदित्यनाथ के फायर ब्रांड तेवर सभी जानते है। वे आलरेडी “कालनेमी” वाला बयान दे चुके हैं । पौराणिक कथाओं में कालनेमि वह राक्षस था जिसने साधु का वेश धरकर हनुमान जी का रास्ता रोकने की कोशिश की थी । तो योगी जी माघ मेले को एक ‘यज्ञ’ के समान मानते हैं. उनके इस बयान को इस संदर्भ में देखा जा रहा है कि जो भी इस आयोजन में बाधा डालता है, वह कालनेमि के समान है ।तो इन कालनेमियों को भी उनकी गति इस कलयुग में भी अवश्य प्राप्त होगी
बाकी हिंदू समाज के दुश्मनों को बाकायदा ऐलान कर “मिट्टी में मिलाने” का कार्य योगी जी बहुत अच्छे से करते हैं ।