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वैज्ञानिक सफलताएं उन्नत के साथ व्यावहारिक भी हो रहीं : शेखावत
डूंगर कॉलेज में रेडिएशन बायोलॉजी एवं कैंसर रिसर्च के फ्रंटियर्स विषय पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में बोले केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री* - *कहा, प्रयोगशालाओं में होने वाली खोजों का तेजी से क्लिनिक तक पहुंचने की आवश्यकता

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी
बीकानेर, 19 जनवरी। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि आज वैज्ञानिक सफलताएं जितनी उन्नत होती जा रही हैं, उतनी ही व्यावहारिक भी हो रही हैं। इस दिशा को और बेहतर करने के लिए यह आवश्यक है कि प्रयोगशालाओं में होने वाली खोजें तेजी से क्लिनिक तक पहुंचे, जिससे चिकित्सकों के व्यावहारिक अनुभव एवं अवलोकन फिर से बेसिक साइंस को दिशा दे सकें।
सोमवार को डूंगर कॉलेज में रेडिएशन बायोलॉजी एवं कैंसर रिसर्च के फ्रंटियर्स विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में ऑनलाइन जुड़े केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि यही सतत संवाद, लैब से बेडसाइड और बेडसाइड से लैब, आधुनिक चिकित्सा को अधिक प्रभावी, सुरक्षित और मानवीय बनाता है। हाल के वर्षों में भारत के वैज्ञानिक इकोसिस्टम और स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर ने कैंसर विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। विशेष रूप से डायग्नोस्टिक्स की सटीकता बढ़ाने, किफायती उपचार विकल्प विकसित करने और गुणवत्तापूर्ण देखभाल को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की दिशा में देश ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि रीजनल कैंसर सेंटर, मेडिकल कॉलेज और कम्युनिटी हॉस्पिटल जैसे देश के अनेक संस्थान अब अत्याधुनिक और जटिल उपचार पद्धतियां करुणा, संवेदनशीलता और उच्च पेशेवर दक्षता के साथ प्रदान कर पा रहे हैं। इसी क्रम में, रेडिएशन बायोलॉजी में किया जा रहा शोध भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। शेखावत ने कहा कि रेडिएशन के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया को बेहतर ढंग से समझना, उपचार से होने वाले साइड इफेक्ट्स को न्यूनतम करना और रोगियों की जीवन-गुणवत्ता में सुधार के लिए डोज़ शेड्यूल को वैज्ञानिक रूप से अनुकूलित करना, ये सभी प्रयास आधुनिक कैंसर उपचार की रीढ़ हैं। ऐसे में, इस क्षेत्र में होने वाले शोध, चाहे वह बेसिक साइंस से जुड़ा हो या क्लिनिकल एप्लिकेशन से, सीधे तौर पर इसी राष्ट्रीय मिशन को सशक्त करता है।
*रेडिएशन, डायग्नोसिस और थेरेपी क्षेत्र का सबसे प्रभावशाली उपकरण*
केंद्रीय मंत्री ने रेडिएशन के महत्व पर बात करते हुए कहा कि यह डायग्नोसिस और थेरेपी, दोनों ही क्षेत्रों में सबसे प्रभावशाली और शक्तिशाली उपकरणों में से एक बन चुका है, लेकिन इसकी वास्तविक शक्ति तभी सार्थक रूप में सामने आती है, जब हम इसके सेलुलर तथा सिस्टमिक स्तर पर पड़ने वाले प्रभावों को गहराई से समझते हैं और उसी वैज्ञानिक समझ के आधार पर इसका सुरक्षित, संतुलित और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करते हैं।
*युवाओं की जिज्ञासा, समर्पण और सहयोग की भावना इस श्रेत्र का भविष्य*
युवा वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को लेकर शेखावत ने कहा कि आपकी जिज्ञासा, समर्पण और सहयोग की भावना ही इस क्षेत्र का भविष्य है। आने वाले वर्षों में यही भारत की वैज्ञानिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। उन्होंने कहा कि आज का विज्ञान उन लोगों को आगे बढ़ाता है, जो विषयों की पारंपरिक सीमाओं से आगे सोचने का साहस रखते हैं, वे भौतिक विज्ञानी, जो जीवविज्ञान को समझने का प्रयास करते हैं, वे चिकित्सक, जो डेटा और इन्फॉर्मेटिक्स की भाषा सीखते हैं। वे जीव विज्ञानी, जो क्लिनिक की जमीनी वास्तविकताओं से जुड़ते हैं।
इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर बीकानेर पश्चिम विधायक श्री जेठानंद व्यास, महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित, सहायक निदेशक कॉलेज शिक्षा श्री पुष्पेंद्र सिंह, आचार्य तुलसी कैंसर रिसर्च केंद्र की निदेशक डॉ. नीति शर्मा, प्राणिशास्त्र विभाग के प्रभारी डॉ प्रताप सिंह सहित देश विदेश से आए विशिष्ट व्यक्तित्वों का मंच पर राजस्थानी परंपरा से स्वागत एवं सम्मान किया गया ।
आयोजन संयोजक डॉ अर्चना पुरोहित ने स्वागत भाषण दिया और दो दिन के कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की।
प्राचार्य प्रो. राजेंद्र पुरोहित ने इस आयोजन के महत्त्व और गरिमा पर उद्बोधन देते हुए इसे नगर सहित प्रदेश की उपलब्धि बताया और विश्वास जताया कि इस आयोजन से आने वाले परिणामों से इस भयानक रोग से सामना करने हमारी शक्ति में इजाफा होगा।
विधायक श्री जेठानंद व्यास ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को दिशा देने वाले होते हैं। प्रबुद्ध वर्ग का यह चिंतन व्यापक समाज के लिए फलदाई साबित होगा।
सहायक निदेशक, कॉलेज शिक्षा श्री शेखावत ने विचार व्यक्त किए।
प्रो मनोज दीक्षित ने कहा कि कैंसर आज मानवता के लिए बड़ा खतरा है। महाविद्यालय इसके प्रति सचेत और सजग है।उन्होंने देशी खान पान और जीवन शैली के प्रति जागरूकता के पक्ष को उस आयोजन का बहुत ही सक्षम पक्ष बताया ।उन्होंने कहा कि दो दिन का यह मंथन हम सब के जीवन के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।उन्होंने महाविद्यालय की इस पहल को अकादमिक जगत के लिए उल्लेखनीय बताया।
दो दिवसीय कान्फ्रेस के निदेशक प्रो कैलाश स्वामी ने बताया कि पहले दिन कांफ्रेंस मे तीन तकनीकी सत्र हुए। जिसमे डॉ अरुण चौगले, श्रीलंका के डॉ जयसिंघम, जेयासुगीथथान एवं लुधियाना के डॉ मेरी जोन, कनाडा के डॉ राज नारनावारे ने विकिरण के स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रभावो पर प्रकाश डाला।
सत्र की अध्यक्षता डॉ कमलेश मुंबरेकर, डॉ एम डी शर्मा के साथ उप्पल घोष ने की।
द्वितीय सत्र की अध्यक्षता करते हुए डॉ स्मिता जैन, डॉ अरुण चौगले एवं जयसिंघम ने बताया कि इस सत्र मे सिंगापुर से डॉ प्रकाश हांडे,इटली की लुका जेंटाइल, कॉलोम्बिया के डॉ मारिया प्लाजस, जर्मनी से डॉ जॉर्ज इलिकीस डॉ एस एन शर्मा रेवाड़ी से ऑनलाइन जुड़कर विकिरण पर मेडिकल फिजिक्स द्वितीयक कैंसर स्टेज पर प्रकाश डाला।
तृतीय सत्र कॉलेज के व्योम केंद्र पर सम्पन्न हुआ। जिसमे सात शोध पत्र का वाचन हुआ। इसमें डॉ सुचेथाकुमारी, डॉ विशाख, डॉ ममता शर्मा अलवर, डॉ सीमा सिंह लखनऊ ,डॉ अरविन्द शर्मा के साथ डॉ आर के पुरोहित ने पौधो के उत्पादों से कैंसर से कैसे बचा जा सकता है, एवं नारियल पानी, आइसो फ्लेविनोइड का कैंसर के बचाव मे किस तरह अनुप्रयोग कर हर्बल पदार्थो का उपयोग कर इस महामारी से बचाव किया जा सकता है।
इसी क्रम में शोधार्थियों ने विषय केंद्रित अपने अपने पोस्टर के द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में हुए शोध नवाचारों प्रदर्शन किया।
व्योम केंद्र में आयोजित हुए तृतीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ मेहुल देव, डॉ विशाख केड़लियाउर डॉ प्रताप सिंह ने की। आगंतुकों के लिए भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन राम रंगमंच पर किया गया। पूर्व संयुक्त निदेशक कॉलेज शिक्षा श्री एम एल गुप्ता के साथ आईएसआरबी की कार्यकारिणी के सभी सदस्यों का स्वागत और सम्मान किया। इस दौरान डॉ. सत्यप्रकाश आचार्य, श्री किशन चौधरी आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रो सोनू शिव और डॉ शशिकांत आचार्य ने किया। डॉ मनीषा अग्रवाल ने आभार जताया।

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