✍️ लेखिका: अंजली पाण्डेय जब लोग किसी का साथ छोड़ना चाहते हैं, तो कोई न कोई बहाना ढूंढ ही लेते हैं। आज मैं अपने दिल की उस सच्चाई को बयान कर रही हूँ, जिसे मैंने सालों से अपने दिल में संजोकर रखा है। मेरा नाम शोभिता है और उसका नाम आदिल था। हम दोनों एक-दूसरे से बेइंतहा प्यार करते थे। मैं इलाहाबाद (प्रयागराज) प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने गई थी। वह वहाँ पहले से ही पढ़ रहा था। उसे मैं काफी दिनों से पसंद थी, लेकिन मैंने कभी इस बात पर ध्यान नहीं दिया। एक दिन उसने अपने दोस्त से कहलवाया कि वह मुझे पसंद करता है और मुझसे सनलाइट पार्क में मिलना चाहता है। पहले तो मैं बहुत घबरा गई। समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ। मन में कई तरह के सवाल थे — “मिलूँ या नहीं? अगर मिली तो लोग क्या कहेंगे?” लेकिन दिल… दिल तो पहले ही उसकी ओर खिंच चुका था। आख़िरकार तय समय पर मैं सनलाइट पार्क पहुँच गई। वह पहले से वहाँ खड़ा था। हाथ में एक गुलाब था… और चेहरे पर वही मासूम सी मुस्कान। उसने गुलाब मेरी तरफ बढ़ाते हुए कहा — “ये तुम्हारे लिए… कब से कहना चाहता था, लेकिन हिम्मत नहीं हुई।” उस पल मुझे ऐसा लगा, जैसे पूरी दुनिया थम सी गई हो… मैंने मुस्कुराकर कहा, “जब ले ही आए हो, तो खुद ही लगा भी दो।” वह बहुत शर्माते हुए मेरे बालों में गुलाब लगाने लगा। वह बहुत घबराया हुआ लग रहा था। फिर धीरे-धीरे बातें करते हुए उसका डर खत्म हो गया और हमारे बीच प्यार बढ़ता चला गया। वह अक्सर मुझसे पूछता, “तुम्हें क्या चाहिए?” पर मैंने उससे कभी कुछ नहीं माँगा, क्योंकि मैं नहीं चाहती थी कि कभी भी मेरे प्यार को लालच कहा जाए। कुछ दिनों बाद उसकी ईद आई और वह अपने घर गुजरात चला गया। जब वह लौटा तो मेरे लिए एक तोहफ़ा लाया — इत्र। मुझे इत्र बहुत पसंद था, और उसे देखकर मैं बहुत खुश हो गई। इसी तरह हमारा प्यार चलता रहा। हमारे प्यार के बारे में सिर्फ मैं, वह और उसका दोस्त ज़हीर ही जानते थे। फिर एक दिन मेरी ज़िंदगी में वह दिन आया, जिसके बारे में मैंने कभी सोचा भी नहीं था… मैं आदिल को बार-बार फोन कर रही थी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिल रहा था। फिर मैंने ज़हीर को फोन किया, पर उसने भी फोन नहीं उठाया। कुछ देर बाद एक मैसेज आया — “शोभिता, तुम लाइफलाइन अस्पताल पहुँचो।” मैं घबराई हुई अस्पताल पहुँची। ज़हीर मुझे देखते ही रोने लगा और बोला — “कल रात आदिल की तबीयत अचानक बहुत खराब हो गई थी… और वह हमें छोड़कर हमेशा के लिए चला गया।” उसने कहा — “वह अपने आख़िरी वक़्त में तुम्हें ही याद कर रहा था, इसलिए मैं तुम्हें उससे मिलवाना चाहता था।” वह मुझे चुपके से आदिल के पास ले गया… जहाँ मेरा आदिल खुदा का हाथ थाम चुका था और मुझे इस दुनिया में अकेला छोड़ गया था। मैं खुद को रोक नहीं पाई। मैंने आख़िरी बार उसके हाथों को चूमा और अपने माथे से लगा लिया। ज़हीर ने अपनी एक दोस्त को बुलाया था मुझे सँभालने के लिए। वह मुझे अस्पताल से बाहर ले आई… लेकिन मेरे दिल की आग कोई कैसे बुझा सकता था? मैंने ज़हीर से एक गुलाब मँगवाया और उसे देते हुए कहा — “जब आदिल को मिट्टी दी जाए, तो मेरी तरफ़ से उसे यह गुलाब दे देना… क्योंकि इस रिश्ते की शुरुआत उसने मुझे गुलाब देकर की थी, और इस रिश्ते का अंत मैं उसे गुलाब देकर करना चाहती हूँ।” ज़हीर आदिल को लेकर उसके शहर गुजरात चला गया… और मैं यहाँ उसकी यादों में तन्हा रह गई। उसके दिए हुए गुलाब की एक पंखुड़ी का मैंने लॉकेट बनवा लिया, जो आज भी मेरे गले में है। और जो गुलाब बचा था, उसे मैंने अपने मंदिर में रख दिया है। दुनिया चाहे कुछ भी सोचे… पर मेरे दिल में उसका प्यार हमेशा ज़िंदा रहेगा। 🌹
✍️ लेखिका: अंजली पाण्डेय जब लोग किसी का साथ छोड़ना चाहते हैं, तो कोई न कोई बहाना ढूंढ ही लेते हैं। आज मैं अपने दिल की उस सच्चाई को बयान कर रही हूँ, जिसे मैंने सालों से अपने दिल में संजोकर रखा है। मेरा नाम शोभिता है और उसका नाम आदिल था। हम दोनों एक-दूसरे से बेइंतहा प्यार करते थे। मैं इलाहाबाद (प्रयागराज) प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने गई थी। वह वहाँ पहले से ही पढ़ रहा था। उसे मैं काफी दिनों से पसंद थी, लेकिन मैंने कभी इस बात पर ध्यान नहीं दिया। एक दिन उसने अपने दोस्त से कहलवाया कि वह मुझे पसंद करता है और मुझसे सनलाइट पार्क में मिलना चाहता है। पहले तो मैं बहुत घबरा गई। समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ। मन में कई तरह के सवाल थे — “मिलूँ या नहीं? अगर मिली तो लोग क्या कहेंगे?” लेकिन दिल… दिल तो पहले ही उसकी ओर खिंच चुका था। आख़िरकार तय समय पर मैं सनलाइट पार्क पहुँच गई। वह पहले से वहाँ खड़ा था। हाथ में एक गुलाब था… और चेहरे पर वही मासूम सी मुस्कान। उसने गुलाब मेरी तरफ बढ़ाते हुए कहा — “ये तुम्हारे लिए… कब से कहना चाहता था, लेकिन हिम्मत नहीं हुई।” उस पल मुझे ऐसा लगा, जैसे पूरी दुनिया थम सी गई हो… मैंने मुस्कुराकर कहा, “जब ले ही आए हो, तो खुद ही लगा भी दो।” वह बहुत शर्माते हुए मेरे बालों में गुलाब लगाने लगा। वह बहुत घबराया हुआ लग रहा था। फिर धीरे-धीरे बातें करते हुए उसका डर खत्म हो गया और हमारे बीच प्यार बढ़ता चला गया। वह अक्सर मुझसे पूछता, “तुम्हें क्या चाहिए?” पर मैंने उससे कभी कुछ नहीं माँगा, क्योंकि मैं नहीं चाहती थी कि कभी भी मेरे प्यार को लालच कहा जाए। कुछ दिनों बाद उसकी ईद आई और वह अपने घर गुजरात चला गया। जब वह लौटा तो मेरे लिए एक तोहफ़ा लाया — इत्र। मुझे इत्र बहुत पसंद था, और उसे देखकर मैं बहुत खुश हो गई। इसी तरह हमारा प्यार चलता रहा। हमारे प्यार के बारे में सिर्फ मैं, वह और उसका दोस्त ज़हीर ही जानते थे। फिर एक दिन मेरी ज़िंदगी में वह दिन आया, जिसके बारे में मैंने कभी सोचा भी नहीं था… मैं आदिल को बार-बार फोन कर रही थी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिल रहा था। फिर मैंने ज़हीर को फोन किया, पर उसने भी फोन नहीं उठाया। कुछ देर बाद एक मैसेज आया — “शोभिता, तुम लाइफलाइन अस्पताल पहुँचो।” मैं घबराई हुई अस्पताल पहुँची। ज़हीर मुझे देखते ही रोने लगा और बोला — “कल रात आदिल की तबीयत अचानक बहुत खराब हो गई थी… और वह हमें छोड़कर हमेशा के लिए चला गया।” उसने कहा — “वह अपने आख़िरी वक़्त में तुम्हें ही याद कर रहा था, इसलिए मैं तुम्हें उससे मिलवाना चाहता था।” वह मुझे चुपके से आदिल के पास ले गया… जहाँ मेरा आदिल खुदा का हाथ थाम चुका था और मुझे इस दुनिया में अकेला छोड़ गया था। मैं खुद को रोक नहीं पाई। मैंने आख़िरी बार उसके हाथों को चूमा और अपने माथे से लगा लिया। ज़हीर ने अपनी एक दोस्त को बुलाया था मुझे सँभालने के लिए। वह मुझे अस्पताल से बाहर ले आई… लेकिन मेरे दिल की आग कोई कैसे बुझा सकता था? मैंने ज़हीर से एक गुलाब मँगवाया और उसे देते हुए कहा — “जब आदिल को मिट्टी दी जाए, तो मेरी तरफ़ से उसे यह गुलाब दे देना… क्योंकि इस रिश्ते की शुरुआत उसने मुझे गुलाब देकर की थी, और इस रिश्ते का अंत मैं उसे गुलाब देकर करना चाहती हूँ।” ज़हीर आदिल को लेकर उसके शहर गुजरात चला गया… और मैं यहाँ उसकी यादों में तन्हा रह गई। उसके दिए हुए गुलाब की एक पंखुड़ी का मैंने लॉकेट बनवा लिया, जो आज भी मेरे गले में है। और जो गुलाब बचा था, उसे मैंने अपने मंदिर में रख दिया है। दुनिया चाहे कुछ भी सोचे… पर मेरे दिल में उसका प्यार हमेशा ज़िंदा रहेगा। 🌹