
ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग
बालोतरा। रामदरा में आयोजित राम कथा के चतुर्थ दिवस समारोह में संत श्री सुखराम जी ने सभी भक्तों के सामने भगवान राम जन्मोत्सव का आनंद और उनके दिव्य कर्मों का विस्तृत परिचय प्रस्तुत किया। इस अवसर पर संत श्री सुखराम जी ने सर्वप्रथम मंगलाचरण किया और भगवान राम के अद्भुत लीलाओं का वर्णन करते हुए कथा का आरंभ किया।
कथा के अनुसार, नारद जी द्वारा भगवान राम को श्राप दिए जाने और मां पार्वती को अहंकार के कारण आए घटनाक्रम का विस्तार से उल्लेख किया गया। कथा में बताया गया कि कैसे भगवान विष्णु ने अपनी लीला से नारद जी के अहंकार का नाश किया और विश्व मोहिनी की सुंदर लीला रची। इस प्रक्रिया में नारद जी ने भी भगवान विष्णु को श्राप दिया कि जिस प्रकार वे स्त्री वियोग में दुखी हुए, उसी प्रकार भगवान की सहायता करने वाले बंदर उनके साथ होंगे। यही घटनाक्रम राम जन्म का एक कारण भी माना जाता है।
इसके अतिरिक्त, कथा में स्वयंभू मनु व शतरूपा के वरदान, सत्यकेतु के पुत्र प्रताप भानु के राजाओं को ब्राह्मणों द्वारा दिए गए श्राप और भगवान राम के अयोध्या में अवतार लेने का वर्णन किया गया। भगवान राम ने दुष्टों का संहार किया और अपने भक्तों का उद्धार किया।
इस अवसर पर उपस्थित सभी भक्तों ने राम जन्मोत्सव की खुशियों में झूमते हुए भजन-कीर्तन का आनंद लिया। समारोह में श्री राधे श्याम जी सराफ, पृथ्वीराज जी सराफ, रामकिशोर जी सराफ और अयोध्या प्रसाद जितेंद्र सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। बाहरी कलाकारों और संगीतकारों ने भजनों के माध्यम से राम जन्मोत्सव को और भी मनोहर बनाया।
चतुर्थ दिवस की कथा और भव्य आयोजन के साथ ही कार्यक्रम का समापन हुआ, और भक्तों ने राम जन्मोत्सव की मंगलकामनाओं के साथ आनंद लिया।

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