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रंगमंच के लिए अनुशासन जरूरी: सुनील जायसवाल

ब्यूरो चीफ सचिन कुमार कसौधन
रंगमंच का प्रारंभ मानव सभ्यता के विकास के साथ हो गया था यह मानव की मूल क्रिया है और विश्व की सभी सभ्यताओं में इसकी स्वीकार्यता है। रंगमंच से व्यक्ति की अंतर्निहित क्षमता का विकास होता है तथा सामूहिकता की भावना बलवती होती है। राजकीय महाविद्यालय सेहमो बस्ती में एक दिवसीय नाट्य प्रशिक्षण शिविर में मुख्य वक्ता और प्रशिक्षक के रूप में आमन्त्रित सुनील जायसवाल ने यह उद्बोधन प्रशिक्षण शिविर का प्रारम्भ करते हुए कहा। आचार्य रामचंद्र शुक्ल कल्चरल क्लब के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित करके किया गया। स्वागत गीत बी ए तृतीय वर्ष की छात्रा प्रीति ने गाया। मीनाक्षी द्वारा सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत किया गया।इस अवसर पर आयोजित लोकगीतों की प्रतियोगिता में रोशनी,आराधना और प्रीति ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त किया। रंगमंच प्रशिक्षण के अंतर्गत प्रतिभागियों को संवाद,अभिनय, मेकअप, हाव-भाव और समन्वय के विषय में विस्तार से बताया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता के प्राचार्य डॉ अतुल कुमार पाण्डेय ने किया।अतिथि के लिए स्वागत वक्तव्य श्री शैलेन्द्र कुमार तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ श्याम मनोहर पाण्डेय द्वारा दिया गया।इस अवसर पर छात्र छात्राओं के अतिरिक्त डॉ रिजवान अहमद, डॉ प्रीति वर्मा,मोहित सोनी, परमानंद सिंह, विजय मिश्र, विनीत सिंह, कमलेश कुमार और वीरेंद्र कुमार उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ आनन्द कुमार पाण्डेय ने किया।

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