
ब्यूरो चीफ डॉ. राम दयाल भाटी बीकानेर
श्रीडूंगरगढ़ बीकानेर तोलाराम मारू
आज श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, श्रीडूंगरगढ़ की ओर से मालूभवन में शासनश्री साध्वी कुंथूश्री जी के सान्निध्य में तेरापंथ के ग्यारहवें आचार्य श्री महाश्रमणजी की दीक्षा के पांच दशक पूरे होने पर दीक्षा कल्याण महोत्सव मनाया गया। स्थानीय विधायक श्री ताराचंदजी सारस्वत तथा विश्वकर्मा कौशल बोर्ड के अध्यक्ष श्री रामगोपाल जी सुथार के मुख्य एवं विशिष्ट आतिथ्य में नगर के जैन एवं जैनेतर गणमान्य जनों की सुन्दर उपस्थिति रही। मुख्य वक्ता के रूप में डाॅ चेतन स्वामी ने कहा कि महाश्रमणजी में श्रेष्ठ आचार्य के सभी गुण तो है ही, परन्तु वे श्रेष्ठ शासनकर्ता भी उन्होंने तेरापंथ धर्म संघ को बहुत ऊंचाई तक पहुंचाया है। वे बौद्धिक होने के साथ दीर्घ तपस्वी भी हैं। डाॅ स्वामी ने जोर देकर कहा कि जिन जातियों सम्प्रदायों के पास गुरु हैं, उन जातियों के लोग भौतिक और अभौतिक दोनों तरह की उन्नति का वरण कर रहे हैं। गुरु विहिन जातियां विभिन्न तरह के कालगत संक्रमणों से बच नहीं सकती। डाक्टर स्वामी ने अपना वक्तव्य मीठी राजस्थानी भाषा में दिया, उन्होंने कहा कि राजस्थानी भाषा पर तेरापंथ के आदि आचार्य भीखणजी स्वामी का बहुत बड़ा उपकार है। उन्होंने राजस्थानी में 38 हजार पदों की रचना की। जयाचार्यजी से लेकर आचार्य श्री तुलसी तक के आचार्यों ने राजस्थानी में रचना कर जनभाषा का मान बढाया।

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