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बनारस के बुनकर पलायन करने को मजबुर आखिर क्यों नहीं रुक रहा पलायन आखिर जिम्मेदार कौन

संवाददाता वशीम अहमद
बनारसी साड़ी को देश विदेश में एक अलग पहचान बनाने वाले बूनकर कि बदहाली का जिम्मेदार कौन
हम बात कर रहे हैं बनारस कि जो दिन-रात मेहनत करके एक से बढ़कर एक नई नई डिजाइन की साड़ी को तैयार करने वाले बुनकर कारीगरों की खाश कर उन की जो दिन-रात मेहनत करते हैं अपना और अपने परिवारों का पेट भरते हैं बारह से पंद्रह घंटे तक काम करते हैं रोज़ का कुआं खोदना रोज़ का पानी पीने जैसा है क्या कभी लोगों ने सोचा है एक साड़ी को तैयार करने में कितने लोगों का हाथ होता है एक साड़ी को तैयार करने में पुरे परिवार का सहयोग होता है तब जाकर एक साड़ी को तैयार करता है बूनकर कारीगर ताना बाना बनाने से लेकर रेशम भरने तक सभी परिवार के लोग लगे रहते हैं तब जाकर एक साड़ी तैयार होता है क्या कभी किसी ने सोचा है परिवार के सभी लोग मिलकर एक दिन में कितने रुपए का काम करते हैं मात्र एक सौ रुपए से लेकर देढ़ सौ रुपए प्रति दिन के हिसाब से काम करते हैं सब परिवार मिलकर
लेकिन उसी में से रेशम की भराई तानी की बनाई तानी की जुड़ाई भी बूनकर अपने उसी कमाईं में से देता है सोचिए इस महंगाई के दौर में क्या कोई बूनकर अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा प्राप्त करवा सकता है यही वजह है कि आज़ बनारस का बूनकर अपने सपरिवार लेकर किसी दूसरे राज्यों में जाकर काम करने को मजबुर है बनारस में रहकर अपने परिवार का सही से भारण पोशण नहीं कर पा रहा है तो अच्छी शिक्षा कहा से दिला पाएगा आज़ भी देश में शिक्षा प्राप्त करने में असफल है गरीब तबके के लोग वजह है बढ़ती मंहगाई और महंगी शिक्षा बेरोजगारी जो बूनकर दिन रात मेहनत करके सौ दौ सौ रुपए कमा कर कैसे अपने आप को खूश रख सकता है कैसे अपने बच्चों को खुश रखेगा
उत्तर प्रदेश के पूर्व मीडिया प्रभारी वसीम अहमद ने कहा कि इस पर उन सभी लोगों को ध्यान देना चाहिए जो बड़े लोग हैं जिनके पास अच्छी इनकम है उनको अपने अपने मोहल्ले में एक शिक्षा के लिए एक छोटा सा शिक्षा केंद्र खोलकर गरीब तबके के बच्चों को पढ़ाने के लिए मदद करें

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