आज तक नहीं मिला पीड़ित को न्याय दर-दर भटकता

बिग ब्रेकिंग,,,
रिपोर्ट दशरथ माली चचोर,,,
चचौर तहसील रामपुरा। जिला नीमच। मध्य प्रदेश ।,,चचोर में झोलाछाप डॉक्टरों का जमावड़ा इतना हो गया है कि इनके पास ना तो कोई एक्सप्रेंस है और ना ही इनके पास कोई लाइसेंस है। बावजूद अपना जमावड़ा इतना लंबा चौड़ा कर रखा है कि 10 से 15 बेड का हॉस्पिटल बना रखा है। जिसमें बिना एक्सप्रेस के होते हुए भी मरीजों का इलाज कर रहे हैं। आए दिन बहुत से मरीज की जान जोखिम में डालते हे। पर किसी ने जबान नहीं खोली ऐसा ही एक वाकिया आज से तीन चार साल पहले हुआ था। पीड़ित दशरथ पिता भगवान जी माली ग्राम चचोर के साथ जिसे आज तक न्याय नहीं मिला और पीड़ित न्याय के दरबार हर न्यायपालिका तक भटकता रहा। पर आज तक न्याय नहीं मिला । चार साल से वह कानून के दरवाजे खटखटा आ रहा है। कानून की लड़ाई 2019,,,2020से लड़ता लड़ता आज 4 साल होने आए पर अभी तक उसको न्याय नहीं मिला क्योंकि डॉक्टर और कुछ रसूखदार लोगों का दबदबा ग्राम चचोर में ऐसा है कि कोई जुबान नहीं खोलता ।ऐसा ही एक डॉक्टर हैचचौर मे ।विश्वजीत पिता रामपद परे बंगाली डॉक्टर हाल मुकाम चचोर ।। दशरथ माली ग्राम चचोर को एक दाद हुआ था। जिसकी गोली दवाई वह डॉक्टर विश्वजीत पिता राम पद परे बंगाली के पास गया था। पर डॉक्टर बंगाली ने गोली देने के बजाय उसको एक्सपायर इंजेक्शन लगा। दिया था। जिसकी वजह से उसको इन्फेक्शन हो गया था। कूल्हे पर और इन्फेक्शन इतना खतरनाक हुआ था कि पूरा पुठा पक गया था ।। और डॉक्टर बंगाली ऐसे ही गोली दवाई दे देकर कहता रहा कि यह ठीक हो जाएगा पर ठीक होने की बजाए और ज्यादा बिगड़ता गया और आखिरकार श्रीमाली को जिसका को बड़े हॉस्पिटल में जाकर उसको ऑपरेशन करवाना पड़ा । समय पर जाकर अगर श्रीमाली इलाज नहीं करवाते तो कब के ही दुनिया से अलविदा हो जाते।।लगभग एक से डेढ़ माह तक हॉस्पिटल में भर्ती रहना पड़ा था। जिसका श्रीमाली को आर्थिक शारीरिक और मानसिक नुकसान हुआ था। जिसकी भरपाई आज तक श्रीमाली नहीं कर पाया। और ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों पर शासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। कारवाही के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती है। सिर्फ हॉस्पिटल पर आकर पंचनामा बनाया जाता है। मौके पर डॉ नहीं मिलता है और उसके क्लीनिक पर ताला लगा हुआ मिलता है। यह सब डॉक्टर पहले से ही सेटिंग होती है। जिस वजह से डॉक्टर 1 महीने तक फरारी काटता रहा। और फिर समय आया अग्रिम जमानत का उससे 2 से 4 दिन पहले आ कर फिर अपना क्लीनिक चलाता हुआ पाया गया। पर किसी ने आज तक कोई कार्रवाई नहीं की।मामूली धाराओं में केस दर्ज कर डॉक्टरों को बेल दे दी जाती है। और केस न्यायपालिका में पेंडिंग चलता रहता है और ऐसे डॉक्टरों के हौसले बुलंद हो जाते हैं। जिससे वह बेखौफ होकर अपना क्लीनिक चलाते आ रहे हैं।। और लोगों की जान जोखिम में डाल रहे हैं।। जिस समय श्रीमाली का इंफेक्शन हुआ था उस समय इस डॉक्टर के पास इंजेक्शन लगाने का कोई वेद लाइसेंस वगैरा-वगैरा नहीं थे।। फिर आनन-फानन में इसने कौन से लाइसेंस बनवाए इसकी हमें कोई जानकारी नहीं है।। और आज तक उस कूल्हे की वजह से ना तो वह कोई काम कर पाता है । क्योंकि माली एकमात्र जरिया है अपने घर का पालन पोषण करने वाला ।। डॉक्टर जीवन की कुछ रिश्ते कम कर दी हैं और। दीया है तो सिर्फ दर्द ही दर्द दिया। जो आज तक श्रीमाली झेल रहा है। और इस इन्फेक्शन की वजह से कब अपने जीवन को अलविदा कह दे। जिसका जिम्मेदार डॉक्टर बंगाली होगा।। क्योंकि उसकी दबंगई इतनी है की कोई जुबान नहीं खोलता उसके सामने ।।कुछ रसूखदार लोगों का भी दबदबा है ।उसके साथ में पर श्री माली ने कानूनी लड़ाई लड़ी। कि उसे न्याय मिलेगा पर वह कानून के दरवाजे खटखटा था खटखटा था आज 4 साल हो गए ।पर श्रीमाली को आज तक न्याय नहीं मिला ।आखिर ऐसा क्यों जब भी न्याय की दाता न्यायपालिका खुलती है तो बस एक ही बात और जवाब मिलता है कि अगली तारीख अगली तारीख आखिर यह तारीख कब जाकर खत्म होगी ।।जब भी हमारा टाइम आता है मिलती है तो सिर्फ तारीख और गरीबों का केस ऐसे ही कचरे के डिब्बे में पड़े पड़े सड़ जाते हैं। और 1 दिन केस लड़ने वाला भी इस दुनिया से अलविदा हो जाता है क्योंकि इस केस के बारे में जिस भाई ने भी इस आवाज को बुलंद किया था ।वह भी आज इस दुनिया में नहीं है ।और श्रीमाली आज भी न्याय के दाता के दरबार में न्याय का इंतजार कर रहा है। कि आखिर हमारे देश का कानून कब गरीबों और निर्धन मजबुरों का न्याय करेगा।। और ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ शक्ति बरतेगा

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