
महेंद्रगढ़ से ब्यूरो चीफ सतीश कुमार की रिपोर्ट
नारनौल
उपायुक्त डॉ जयकृष्ण आभीर ने आज कैंप कार्यालय से राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत निक्षय योजना के 75 लाभार्थियों के लिए प्रोटीन युक्त खाद्य सामग्री के किट गाड़ी में भरवाकर संबंधित स्वास्थ्य केंद्र भिजवाए। यह किट उनके सुपुत्र जयंत व जतिन तथा मिशन महेंद्रगढ़ अपना जल अभियान की ओर से तैयार करवाए गए थे।
डीसी ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र बाछोद में 31, रामपुरा में 15 तथा जिला क्षय रोग केंद्र में 29 किट भिजवाए जाएंगे। इनमें से 50 किट मिशन महेंद्रगढ़ अपना जल अभियान की तरफ से हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से आए मनोज कुमार को यह किट सुपुर्द किए गए।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत देश को वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इस कार्यक्रम में निक्षय योजना के तहत कोई भी नागरिक टीबी मरीज को गोद ले सकता है ताकि उसे प्रोटीन युक्त खाद्य सामग्री दी जा सके।
उपायुक्त ने बताया कि जिला महेंद्रगढ़ में फिलहाल टीबी के लगभग एक हजार मरीज हैं। उन्होंने बताया कि स्टांप वेंडर की तरफ से भी निक्षय मरीजों को लगभग 50 किट जल्द ही दिए जाएंगे। इसके अलावा भी कई अन्य नागरिक भी इस अभियान से जुड़ने वाले हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत मरीज को 6 महीने तक प्रतिमाह 500 रुपए की कीमत की खाद्य सामग्री की किट दी जाती है
ऐसे बन सकते हैं निक्षय मित्र
नारनौल। उपायुक्त ने बताया कि टीबी मरीजों की सहायता करने के लिए कोई भी नागरिक निक्षय मित्र बन सकता है। इसके लिए एक पोर्टल बनाया गया है जिस पर वह किसी भी प्रकार की सहायता के लिए अपने आप को पंजीकृत करवा सकता है।
इस कार्य के लिए सबसे पहले उसे कम्युनिटीसपोर्ट डॉट निक्षय डॉट इन पर जाना होगा। इसके बाद प्रधानमंत्री टीबी मुक्त अभियान पर क्लिक करना है। फिर निक्षय मित्र पंजीकरण फार्म भरने के बाद जिस मरीज की आप सहायता करना चाहते हैं उसका चयन करें। अंत में किस प्रकार की सहायता करना चाहते हैं उसका भी चयन करें।
निक्षय पोषण योजना के तहत हर माह दिए जा रहे 500 रुपए
नारनौल। इस संबंध में सीएमओ डॉ धर्मेश सैनी ने बताया कि टीबी के मरीज को सरकार की निक्षय पोषण योजना के द्वारा हर माह 500 रुपए पोषाहार के लिए दिए जा रहे हैं। इसके अलावा बिगड़ी हुई टीबी के मरीजों का इलाज व उपचार के दौरान फोलोअप के लिए आने पर किराया भी दिया जाता। बिगड़ी हुई टीबी के ईलाज के लिए एक मरीज का डेढ़ से दो लाख का खर्चा होता है, जो मुफ्त किया जाता है। टीबी मरीज के इलाज देने के लिए आशा वर्कर या वालिंटियर डॉट्स प्रोवाईडर को भी 1000 से 5000 तक की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है। टीबी मरीज की सूचना देने वाले को 500 रुपए देने का प्रावधान है तथा इसके अलावा सफलतापूर्वक इलाज होने पर भी 500 रुपए दिए जाते हैं।
फोटो-लाभार्थियों के लिए प्रोटीन युक्त खाद्य सामग्री के किट गाड़ी में भरवाकर रवाना करते डीसी डॉ जयकृष्ण आभीर उनके सुपुत्र जयंत।
डीसी डॉ जयकृष्ण आभीर ने 75 लाभार्थियों के लिए प्रोटीन युक्त खाद्य सामग्री के किट गाड़ी में भरवाकर स्वास्थ्य केंद्रों पर भिजवाए
50 किट मिशन महेंद्रगढ़ अपना जल अभियान की तरफ से भेजे
नारनौल
उपायुक्त डॉ जयकृष्ण आभीर ने आज कैंप कार्यालय से राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत निक्षय योजना के 75 लाभार्थियों के लिए प्रोटीन युक्त खाद्य सामग्री के किट गाड़ी में भरवाकर संबंधित स्वास्थ्य केंद्र भिजवाए। यह किट उनके सुपुत्र जयंत व जतिन तथा मिशन महेंद्रगढ़ अपना जल अभियान की ओर से तैयार करवाए गए थे।
डीसी ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र बाछोद में 31, रामपुरा में 15 तथा जिला क्षय रोग केंद्र में 29 किट भिजवाए जाएंगे। इनमें से 50 किट मिशन महेंद्रगढ़ अपना जल अभियान की तरफ से हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से आए मनोज कुमार को यह किट सुपुर्द किए गए।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत देश को वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इस कार्यक्रम में निक्षय योजना के तहत कोई भी नागरिक टीबी मरीज को गोद ले सकता है ताकि उसे प्रोटीन युक्त खाद्य सामग्री दी जा सके।
उपायुक्त ने बताया कि जिला महेंद्रगढ़ में फिलहाल टीबी के लगभग एक हजार मरीज हैं। उन्होंने बताया कि स्टांप वेंडर की तरफ से भी निक्षय मरीजों को लगभग 50 किट जल्द ही दिए जाएंगे। इसके अलावा भी कई अन्य नागरिक भी इस अभियान से जुड़ने वाले हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत मरीज को 6 महीने तक प्रतिमाह 500 रुपए की कीमत की खाद्य सामग्री की किट दी जाती है
ऐसे बन सकते हैं निक्षय मित्र
नारनौल। उपायुक्त ने बताया कि टीबी मरीजों की सहायता करने के लिए कोई भी नागरिक निक्षय मित्र बन सकता है। इसके लिए एक पोर्टल बनाया गया है जिस पर वह किसी भी प्रकार की सहायता के लिए अपने आप को पंजीकृत करवा सकता है।
इस कार्य के लिए सबसे पहले उसे कम्युनिटीसपोर्ट डॉट निक्षय डॉट इन पर जाना होगा। इसके बाद प्रधानमंत्री टीबी मुक्त अभियान पर क्लिक करना है। फिर निक्षय मित्र पंजीकरण फार्म भरने के बाद जिस मरीज की आप सहायता करना चाहते हैं उसका चयन करें। अंत में किस प्रकार की सहायता करना चाहते हैं उसका भी चयन करें।
निक्षय पोषण योजना के तहत हर माह दिए जा रहे 500 रुपए
नारनौल। इस संबंध में सीएमओ डॉ धर्मेश सैनी ने बताया कि टीबी के मरीज को सरकार की निक्षय पोषण योजना के द्वारा हर माह 500 रुपए पोषाहार के लिए दिए जा रहे हैं। इसके अलावा बिगड़ी हुई टीबी के मरीजों का इलाज व उपचार के दौरान फोलोअप के लिए आने पर किराया भी दिया जाता। बिगड़ी हुई टीबी के ईलाज के लिए एक मरीज का डेढ़ से दो लाख का खर्चा होता है, जो मुफ्त किया जाता है। टीबी मरीज के इलाज देने के लिए आशा वर्कर या वालिंटियर डॉट्स प्रोवाईडर को भी 1000 से 5000 तक की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है। टीबी मरीज की सूचना देने वाले को 500 रुपए देने का प्रावधान है तथा इसके अलावा सफलतापूर्वक इलाज होने पर भी 500 रुपए दिए जाते हैं।
फोटो – लाभार्थियों के लिए प्रोटीन युक्त खाद्य सामग्री के किट गाड़ी में भरवाकर रवाना करते डीसी डॉ जयकृष्ण आभीर उनके सुपुत्र जयंत।
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