श्री गणपति स्थापना के साथ श्री भेरुनाथ मंदिर उद्यापन व भगवान देवनारायण जी की मूर्ति प्रतिष्ठा के कार्यक्रमों शुरूवात।
आयोजन में मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा, मेला,भजन संध्या यज्ञ हवन व मंदिर पर कलश, महा
प्रसादी का आयोजन किया जाएगा।
सिंगोली तहसील के ग्राम झांतला में अति चमत्कारिक व
स्वयंभू भेरुजी के उद्यापन व भगवान देवनारायण की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के तहत विभिन्न आयोजन आयोजित किये जा रहे हैं। जिसको लेकर क्षेत्र के लोगों में अपार उत्साह देखा जा रहा है। जिसमें क्षेत्र वासी बढ़ चढ़कर तन मन धन से सहयोग कर रहे हैं। वह श्रम व परिश्रम करके अपने पसीने की आहुति दे रहे हैं। इस आयोजन को सफल व ऐतिहासिक बनाने में सभी लोगों द्वारा जो प्रयास वह मेहनत की जा रही है। उसकी सर्वत्र प्रशंसा की जा रही है।
झांतला भेरुजी को लेकर पूर्व में हमने भेरुजी का इतिहास दिखाया है। लेकिन धीरे-धीरे झांतला भेरुजी की लोक मान्यता व किंवदंती के किस्से लोगों द्वारा जो बताए जा रहे हैं। उसके तहत भेरुजी का इतिहास काफी प्राचीन है। वह यह मूर्ति स्थापित की गई नहीं है। यह स्वयंभू मूर्ति है। इसके अनेक चमत्कार इस क्षेत्र के पूर्वजों व पुरखों ने देखे व सुने जनश्रुति अनुसार लोगों की भेरुजी पर अपार आस्था व, श्रद्धा देखने को मिल रही है।
झांतला भेरुजी का इतिहास जहां मंदिर बना हुआ है। वह गुजरी का बड़ा हुआ करता था और वह पत्थर अपने आप रोज निकलता था। गुजरी रोज तोड़ दिया करती थी जब साक्षात भेरुजी ने प्रकट होकर कहा कि तुम यह जगह छोड़ दो तब भेरुजी से कहा कि मैं कैसे मान लूं कि आप भगवान हो यदि भगवान हो तो मेरे सब बकरे मर जाए तब यही हुआ तब गुजरी को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने उस स्थान को छोड़ने की प्रार्थना भगवान से की तो वापस बकरे जिंदा हो गए हैं।
इस मंदिर को लेकर एक तथ्य यह भी सामने आया है कि इस मंदिर के पुराने देवरे को बिजोलिया के जैन परिवार द्वारा बनाया गया है। एक जैन परिवार जब झांतला से पैदल गुजर रहा था तब वह इस स्थान पर रुके और उस दंपति के कोई औलाद नहीं थी तब भेरुनाथ ने उन्हें कहा कि तुम्हें बहुत जल्दी औलाद हो जाएगी 60 साल की उम्र में उस दंपति के औलाद हुई। तब उस दंपति द्वारा यहां मंदिर बनवाने की घोषणा की गई लेकिन औलाद होने के बाद वह यह मंदिर बनवाना भूल गया जब वह इसी रास्ते पर अपने बच्चों को पालने में लेकर जा रहा था तब इसी स्थान से वह पालना हवा में उड़कर दूसरे गांव मेंघपूरा गौड में खेतों में जा गिरा। जब इस बात का पता गांव वालों को लगा तो उन्होंने चारों तरफ उस पालने को ढूंढा तो बच्चा सुरक्षित खेत में दूध पी रहा था। तब उस जैन परिवार ने पुराने देवर का निर्माण किया। झांतला भेरुजी को जैन समाज के लोग भी बड़ी श्रद्धा से मानते हैं।
लेकिन भेरुजी की आज्ञा से उस पुराने देवर को 12 गांवो के लोगों द्वारा आज भव्य मंदिर का रूप दिया गया जिसके तहत श्री भेरुनाथ मंदिर के उद्यापन वह भगवान देवनारायण की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा को लेकर झांतला में ऐतिहासिक कार्यक्रम किए जा रहे हैं। पूरे नगर को आकर्षक विद्युत साथ सजा व केसरिया ध्वज व फरिया, बैनर, पोस्टर से पाट दिया गया है। रंग बिरंगी लाइट से पूरे नगर को सजाया गया है। मंदिर पर आकर्षक विद्युत साथ सजा की गई है। बिल्कुल अयोध्या जैसा नजारा झांतला में देखने को मिल रहा है। लोगों में इस आयोजन को लेकर अपार खुशी देखी जा रही है। ग्राम में मेले के लिए दुकान मनोरंजन के लिए झूले चकरी व प्रतिदिन हवन अनुष्ठान यज्ञ व रात्रि में 15 तारीख को स्थानीय कलाकारों द्वारा भजन संध्या 16 तारीख को बद्री लाल गाडरी द्वारा देवनारायण भगवान की कथा वह 17 तारीख को संत प्रकाश दास जी महाराज की भजन संध्या 18 तारीख को भगवत सुथार की भजन संध्या रखी गई है 19 तारीख को यज्ञ की पूर्णाहुति के साथ भगवान देवनारायण जी की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा वह दोनों मंदिरों पर स्वर्ण कलश के साथ महाप्रसादी का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन में 12 गांवों के लोगों द्वारा अपना पूरा सहयोग दिया जा रहा है।
सिंगोली से ख्वाजा हुसैन मेवाती के साथ दशरथ माली की रिपोर्ट