नर्मदापुरम / बनखेड़ी के ग्राम बाचावानी में अति प्राचीन गणेश मंदिर श्री गणेश धाम बाचावानी में तिलकुटा गणेश पर इस बार एक लाख श्रद्धालुओं को पहुंचने की उम्मीद है। तिलकुटा गणेश जैसे तिल चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है , प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु गणेश धाम बाचावानी माथा टेकने पहुंचते हैं।
15 दिन पूर्व से होती है तैयारी प्रारंभ
श्री गणेश धाम बाचावानी में भगवान श्री गणेश के दर्शन करने हेतु श्रद्धालु पहुंचते हैं जिसे लेकर ग्रामीणों में गजब का उत्साह देखने को मिलता है लगभग 15 दिन पूर्व से ही ग्राम बाचावानी के नागरिक भगवान श्री गणेश उत्सव को मनाने हेतु तैयारियां प्रारंभ कर देते हैं इस दिन ग्राम के सभी रिश्तेदार नातेदार बहन बेटियों का आगमन 3 दिन पूर्व से ही प्रारंभ हो जाता है।
यह गणेश धाम की कहानी
ग्राम के बुजुर्गों की जुबानी से यह कहानी सुनने को मिलती है कि गणेश धाम बाचावानी प्रतिमा विराजमान है । बुजुर्गों के अनुसार ग्राम फतेहपुर में राजाओं का राज्य था, राजा भगवान गणेश की पूजा करने गणेश धाम बाचावानी पहुंचते थे। राजा के मन में विचार आया कि क्यों ना भगवान गणेश की प्रतिमा फतेहपुर में स्थापित की जाए इसको लेकर राजा द्वारा भगवान गणेश प्रतिमा हाथी पर सवार कर फतेहपुर ले जाने का प्रयास किया किंतु गणेश धाम के भक्त उदास हुए और भगवान गणेश से प्रार्थना की ,, भगवान गणेश ने भक्तों की पुकार सुनी और भगवान गणेश ने अपना बजन इतना बड़ा लिया की हाथी मूर्ति लेकर उठ नहीं सका। राजा ने तुरंत नतमस्तक होकर प्रभु से क्षमा मांगी और पूरे सम्मान के साथ पंडित जी को मूर्ति मंदिर में स्थापित करने को कहा मूर्ति पुनः उसी स्थान पर विराजित होने पर गांव के लोगों द्वारा उत्सव मनाया गया मूर्ति तभी से विराजमान है प्रतिमाह माघ माह के चतुर्थी पर यहां मेले का आयोजन होता है और इस चतुर्थी पर ग्राम के लोगों द्वारा त्योहार के रूप में मनाया जाता है ग्राम में पूर्व में छोटा सा मंदिर था। परंतु ग्रामीणों के सहयोग से आज मंदिर में विशाल रूप ले लिया है मंदिर में वर्ष भर धार्मिक गतिविधियां चलती रहती हैं एवं प्रतिबर्ष चतुर्थी पर यहां विशाल भजन प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है फिर चतुर्थी के दिन यहां दूर-दूर से भक्त भगवान गणेश के दर्शन करने आते हैं जिनकी मुंह मांगी मुराद भगवान गजानन द्वारा पूरी की जाती है

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