संतो की संगति में होती है चार फलों की प्राप्ति महात्मा श्री गिरधारी नंद जी

गुना। मानव उत्थान सेवा समिति के द्वारा ग्राम सनबाड़ा में आयोजित श्री राम कथा समारोह के दूसरे ब अंतिम दिवस मैं हरिद्वार से पधारी सदगुरुदेव श्री सतपाल जी महाराज की शिष्या महात्मा अंबालिका बाई जी ने अपने विचार रखते हुए बताया की आज मानव अशांत दुखी और परेशान है सुख की खोज में जगह जगह भटक रहा है जीवन में सुख की प्राप्ति कैसे हो इसका उपाय हमें सत्संग से प्राप्त होता है और सारे दुख अशांति की जड़ मानव का मन है यह चंचल मन कैसे स्थिर हो इसके लिए हमें ईश्वर के अविनाशी नाम को जानने की आवश्यकता है जेसे सूर्य की शक्ती से अंधकार का प्रभाव खत्म हो जाता है नाम की शक्ती से माया का प्रभाव ख़त्म जाता है उस नाम की प्राप्ति हमें समय के सद्गुरु के द्वारा होती है महात्मा श्री गिरिधारी नंदजी ने कहा संतों की संगति से होती है चार फलों की प्राप्ति संत शिरोमणि तुलसीदास जी कहते हैं की सुनि समुझहिं जन मुदित मन मज्जहिं अति अनुराग।
लहहिं चारि फल अछत तनु साधु समाज प्रयाग ।।
जो मनुष्य इस संत समाज रूपी तीर्थराज का प्रभाव प्रसन्न मन से सुनते और समझते हैं और फिर अत्यन्त प्रेमपूर्वक इसमें गोते लगाते हैं, वे इस शरीर के रहते ही चारों फल पा जाते हैं जो ईश्वर प्राप्ति के चारों साधन है महात्मा कृतिका बाई जी ने कहा कि जब हमारे पुण्य जागृत होते हैं तब हमें संतो के दर्शन एवं सत्संग की प्राप्ति होती है
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