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भगवान की शरणागति से जीवन की बाधाएं होती हैं दूर : प्रो. डॉ. नवीन सिंह
श्रीरामचरितमानस की चौपाइयों में छिपा है शरणागति और आध्यात्मिक शांति का संदेश

बस्ती से वेदान्त सिंह
बस्ती। श्रीरामचरितमानस के किष्किंधाकांड में भगवान श्रीराम वर्षा ऋतु का वर्णन करते हुए लक्ष्मण जी को प्रकृति के माध्यम से आध्यात्मिक जीवन का गहरा संदेश देते हैं। गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिखा है—
“सुखी मीन जे नीर अगाधा।
जिमि हरि सरन न एकउ बाधा।।
फूलें कमल सोह सर कैसा।
निर्गुन ब्रह्म सगुन भएँ जैसा।।’’
इन चौपाइयों का भाव स्पष्ट करते हुए प्रो. डॉ. नवीन सिंह, निदेशक, संकल्प योग वैलनेस सेंटर, बस्ती ने कहा कि अगाध जल में रहने वाली मछलियां जिस प्रकार सुरक्षित और सुखी रहती हैं, उसी प्रकार भगवान श्रीहरि की शरण में जाने वाले जीव के जीवन की बाधाएं दूर होने लगती हैं।
उन्होंने कहा कि कमलों के खिलने से जिस प्रकार तालाब की सुंदरता बढ़ जाती है, उसी प्रकार भगवान की भक्ति और शरणागति से मनुष्य के भीतर छिपी आंतरिक सुंदरता, सकारात्मकता और शांति प्रकट होती है। प्रभु के चरणों में समर्पण मनुष्य को कठिन परिस्थितियों में धैर्य और विश्वास प्रदान करता है।
प्रो. डॉ. सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में तनाव, चिंता और अनेक प्रकार की चुनौतियों के बीच व्यक्ति को आध्यात्मिक आधार की आवश्यकता है। नियमित योग, ध्यान, प्रार्थना और प्रभु का स्मरण मन को स्थिर एवं सकारात्मक रखने में सहायक हो सकता है।
उन्होंने कहा कि “भगवान की शरण में रहने का अर्थ जीवन की जिम्मेदारियों से विमुख होना नहीं, बल्कि उन्हें प्रभु के प्रति विश्वास और समर्पण की भावना के साथ निभाना है।”
उन्होंने सभी से आह्वान किया कि जीवन में अहंकार और नकारात्मकता को छोड़कर रामचरण की शरण में रहें, प्रभु का स्मरण करें और मानव जीवन को सेवा, सद्भाव एवं सकारात्मकता से सार्थक बनाएं।

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