बीकानेरब्रेकिंग न्यूज़राजस्थान
रंगरूड़ौ राजस्थान’ में सजेगा लोक संस्कृति का भव्य रंगमंच, 40 फीट मूंछ व विश्व की सबसे बड़ी पगड़ी बनेंगी आकर्षण
2 अगस्त को श्री हनुमान मंदिर, लूणकरनसर में होगा भव्य समापन समारोह, मुख्य अतिथि होंगे इतिहासकार राजवीर सिंह चलकोई

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी
लूणकरनसर। पंडित जी फाउंडेशन फॉर कल्चरल हेरिटेज ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित पाँच दिवसीय राजस्थानी सांस्कृतिक महोत्सव ‘रंगरूड़ौ राजस्थान’ का भव्य समापन रविवार, 2 अगस्त को श्री हनुमान मंदिर प्रांगण, लूणकरनसर में सायं 5:00 बजे होगा। कार्यक्रम का उद्देश्य राजस्थानी भाषा, लोककला, संस्कृति एवं समृद्ध विरासत के संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी तक उसके गौरव को पहुँचाना है।
कार्यक्रम संयोजक राम शर्मा ने बताया कि समापन समारोह में राजस्थान की समृद्ध लोक परंपराओं को लोकगीत, लोकनृत्य एवं रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से मंचित किया जाएगा। यह आयोजन युवाओं को अपनी मातृभाषा, संस्कृति और परम्पराओं से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास है।
ट्रस्ट के संस्थापक स्वरूप पंचारिया ने बताया कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रख्यात इतिहासकार श्री राजवीर सिंह चलकोई होंगे। विशिष्ट अतिथियों में डॉ. हरिमोहन सारस्वत ‘रूंख’, डॉ. गजादान चारण ‘शक्तिसुत’, श्री राज बिजारणीया, श्री देवीलाल महीया, श्री छैलू चारण, श्री रामजी लाल घोड़ेला एवं श्री ओंकारनाथ योगी उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यकार, लोक कलाकार, संस्कृति प्रेमी एवं गणमान्य नागरिक भाग लेंगे। आयोजन में राजस्थानी मोटियार परिषद, बीकानेर का विशेष सहयोग रहेगा।
समारोह के प्रमुख आकर्षणों में 40 फीट लंबी मूंछों की विशेष प्रदर्शनी, विश्व की सबसे बड़ी पगड़ी की प्रदर्शनी, राजस्थानभर से आए कलाकारों की राजस्थानी साफ़ा प्रतियोगिता, राजस्थानी संस्कृति सम्मान समारोह तथा मनमोहक लोक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ शामिल रहेंगी, जो दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होंगी।
स्वरूप पंचारिया ने सभी संस्कृति प्रेमियों एवं क्षेत्रवासियों से सपरिवार अधिकाधिक संख्या में कार्यक्रम में उपस्थित होकर इस सांस्कृतिक महाउत्सव को सफल बनाने की अपील की। उन्होंने विशेष रूप से पुरुषों से धोती-कुर्ता एवं राजस्थानी साफ़ा तथा महिलाओं से पारम्परिक राजस्थानी वेशभूषा में पधारने का आग्रह किया।
आयोजकों का कहना है कि ‘रंगरूड़ौ राजस्थान’ केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि राजस्थानी अस्मिता, लोक संस्कृति और गौरवशाली विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का जनआंदोलन है। समापन समारोह को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह का वातावरण बना हुआ है।

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