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जोधपुर: भव्य शोभायात्रा के साथ क्रिया भवन में हुआ मुनि औचित्यरत्नविजय का चातुर्मास मंगल प्रवेश

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग
जोधपुर, 26 जुलाई। जोधपुर में रविवार को जैन समाज की ओर से आध्यात्मिक आस्था, श्रद्धा और गुरु भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिला। जैनाचार्य रामचंद्रसूरीश्वर महाराज समुदाय के आचार्य तपोरत्नसूरीश्वर महाराज के शिष्य मुनि औचित्यरत्नविजय एवं साधु-साध्वीवृंद का भव्य चातुर्मास मंगल प्रवेश क्रिया भवन में संपन्न हुआ। इस अवसर पर शहरभर में जिनशासन के जयकारे गूंज उठे और श्रद्धालुओं ने अक्षत वधावणा एवं जयघोष के साथ साधु-संतों का स्वागत किया।
तपागच्छ संघ के प्रवक्ता धनराज विनायकिया ने बताया कि जालोरी गेट स्थित जलते दीप भवन से श्रावक स्वर्गीय मखत्तूरमल अनूपम चोरड़िया परिवार के निवास स्थान से विशाल शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में हाथी, घोड़े, ऊंट, कच्छी घोड़ी, बग्गियां एवं आधुनिक बैंड की आकर्षक प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर साधु-संतों का अभिनंदन किया।
क्रिया भवन पहुंचने पर वल्लभ महिला मंडल द्वारा सामैया तथा गुरु भक्तों द्वारा “गुरुजी हमारो अंतरनाथ, अपने आपो आशीर्वाद” के जयघोष के साथ अक्षत वधावणा कर स्वागत किया गया। विशेष आकर्षण यह रहा कि शोभायात्रा में शामिल हाथी ने भी नतमस्तक होकर साधु-संतों और चतुर्विध संघ को सलामी दी।
संघ सचिव उम्मेदराज रांका एवं रिकबराज बोहरा ने बताया कि कार्यक्रम में चातुर्मास प्रवेश के लाभार्थी अनुपम चोरड़िया परिवार, साधर्मिक भक्ति के लाभार्थी हनुमानचंद दुगड़ परिवार तथा गुरु पूजन के लाभार्थी जगदीशचंद्र खांटेड़, पात्रा बोहरा एवं अन्य लाभार्थी परिवारों का तपागच्छ संघ ट्रस्ट मंडल द्वारा सम्मान किया गया।
इस अवसर पर प्रवचन देते हुए मुनि जगतपूज्यविजय ने कहा कि जीवन का वास्तविक सार आत्मकल्याण में है। उन्होंने शास्त्र अध्ययन की महत्ता बताते हुए कहा कि जब व्यक्ति अपनी भूल को स्वीकार करता है, तभी उसके सुधार का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से चातुर्मास के दौरान अधिक से अधिक धर्म आराधना, प्रवचन श्रवण और आत्मचिंतन करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि क्रिया भवन को ज्ञान भवन और चरित्र भवन बनाना है। दूसरों को प्रसन्न करने के बजाय भगवान को प्रसन्न करने का प्रयास करना चाहिए, तभी आत्मकल्याण संभव है। चातुर्मास के दौरान परमात्मा की वाणी का अधिकाधिक लाभ लेकर जीवन को सार्थक बनाने का संदेश दिया गया।
आयोजकों ने बताया कि साधु-साध्वियों की प्रेरणा से पूरे चातुर्मास के दौरान क्रिया भवन में बिजली, पंखे, मोबाइल सहित अन्य आधुनिक उपकरणों का उपयोग नहीं किया जाएगा, ताकि पूर्ण धार्मिक अनुशासन एवं साधना का वातावरण बना रहे।
कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी, बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं, युवा एवं महिला मंडलों की सक्रिय भागीदारी रही। तपागच्छ संघ के पदाधिकारियों ने इसे ऐतिहासिक आध्यात्मिक आयोजन बताते हुए सभी धर्मप्रेमियों से चातुर्मास का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया।

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