अब जागो जागो कविता : अंजलि पांडेय अब जागो, जागो भारत के लोगों, अब माँ भारती ने चीख मारी है। जो देख रहे हो तुम हाहाकार, ये चुप रहने का नतीजा है। अब जागो, जागो भारत के लोगों, अब माँ भारती ने चीख मारी है। उस सत्ताधारी के मतवाले ने, ये कैसी हालत कर दी है। इनकी आपसी रंजिश में, भारत की जनता पिसती है। घर, सड़क, पुल, स्कूल यहाँ, आए दिन टूटते हैं। ये मासूम लोग यूँ ही, टैक्स के नाम पर लूटे जाते हैं। आज फिर से, माँ भारती ने दर्द से चीख मारी है। उठ जाओ, भारत के लोगों, ये चुप रहने का नतीजा है। ये चुप रहने का नतीजा है। जो पत्रकार आवाज़ उठाते हैं, ये उन्हें मौत के घाट उतारते हैं। जो लोग आवाज़ उठाते हैं, ये उन्हें 'एंटी-नेशनल' कहते हैं। यहाँ जनता भूख से मरती है, वो मज़े से दावत उड़ाते हैं। ये जनता का खून पीने वाले, जनता को ही इंसानियत सिखाते हैं। आज उन असहायों की आहों ने, भीड़ को खींचा है। अभी भी वक्त है, जाग जाओ, ये चुप रहने का नतीजा है। "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" के नारे ये लगाते हैं। गायब होती लड़कियों को, पर ये ढूँढ नहीं पाते हैं। रेप जैसे मुद्दे को ये, छोटी-सी गलती बताते हैं। फिर इन्हीं बलात्कारियों को ये, सांसद, मंत्री बनाते हैं। कोई इन बलात्कारियों का फूफा है, कोई जीजा है। अब तो जाग जाओ, भारतवासियों, ये चुप रहने का नतीजा है। ना समझो कि नासमझी का, ये कुछ इस तरह फायदा उठाते हैं। चोर से कहते हैं चोरी कर, फिर शाह को भी जगाते हैं। मंदिर-मस्जिद के मुद्दे पर ये, हमें आपस में लड़वाते हैं। और विदेशों में अपने लिए ये, सुंदर महल बनाते हैं। सतरंगी भारत की धरती को, इन्होंने कर दिया फीका है। अब तो जागो, भारत के लोगों, ये चुप रहने का नतीजा है। जिस आग को खुद ही लगाया है, अब उसी आग से डर रहे हैं। भारत को दीमक की तरह छलकर, खुद विदेशों में ठिकाना बना रहे हैं। सच कहती हूँ, तुमसा घटिया, होगा न जग में और कोई। इस प्यारी जनता के लिए ये, लाठीचार्ज, आँसू गैस और फोर्स पर फोर्स भेज रहे हैं। यह सब देखकर कह रही हूँ, कि तू नीचों से भी नीचा है। अब तो जागो, भारत के वासी, ये चुप रहने का नतीजा है। जागो, जागो भारत के लोगों, अब माँ भारती ने चीख मारी है। जो देख रहे हो यह हाहाकार, ये चुप रहने का नतीजा है। — कविता : अंजलि पांडेय
अब जागो जागो कविता : अंजलि पांडेय अब जागो, जागो भारत के लोगों, अब माँ भारती ने चीख मारी है। जो देख रहे हो तुम हाहाकार, ये चुप रहने का नतीजा है। अब जागो, जागो भारत के लोगों, अब माँ भारती ने चीख मारी है। उस सत्ताधारी के मतवाले ने, ये कैसी हालत कर दी है। इनकी आपसी रंजिश में, भारत की जनता पिसती है। घर, सड़क, पुल, स्कूल यहाँ, आए दिन टूटते हैं। ये मासूम लोग यूँ ही, टैक्स के नाम पर लूटे जाते हैं। आज फिर से, माँ भारती ने दर्द से चीख मारी है। उठ जाओ, भारत के लोगों, ये चुप रहने का नतीजा है। ये चुप रहने का नतीजा है। जो पत्रकार आवाज़ उठाते हैं, ये उन्हें मौत के घाट उतारते हैं। जो लोग आवाज़ उठाते हैं, ये उन्हें 'एंटी-नेशनल' कहते हैं। यहाँ जनता भूख से मरती है, वो मज़े से दावत उड़ाते हैं। ये जनता का खून पीने वाले, जनता को ही इंसानियत सिखाते हैं। आज उन असहायों की आहों ने, भीड़ को खींचा है। अभी भी वक्त है, जाग जाओ, ये चुप रहने का नतीजा है। "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" के नारे ये लगाते हैं। गायब होती लड़कियों को, पर ये ढूँढ नहीं पाते हैं। रेप जैसे मुद्दे को ये, छोटी-सी गलती बताते हैं। फिर इन्हीं बलात्कारियों को ये, सांसद, मंत्री बनाते हैं। कोई इन बलात्कारियों का फूफा है, कोई जीजा है। अब तो जाग जाओ, भारतवासियों, ये चुप रहने का नतीजा है। ना समझो कि नासमझी का, ये कुछ इस तरह फायदा उठाते हैं। चोर से कहते हैं चोरी कर, फिर शाह को भी जगाते हैं। मंदिर-मस्जिद के मुद्दे पर ये, हमें आपस में लड़वाते हैं। और विदेशों में अपने लिए ये, सुंदर महल बनाते हैं। सतरंगी भारत की धरती को, इन्होंने कर दिया फीका है। अब तो जागो, भारत के लोगों, ये चुप रहने का नतीजा है। जिस आग को खुद ही लगाया है, अब उसी आग से डर रहे हैं। भारत को दीमक की तरह छलकर, खुद विदेशों में ठिकाना बना रहे हैं। सच कहती हूँ, तुमसा घटिया, होगा न जग में और कोई। इस प्यारी जनता के लिए ये, लाठीचार्ज, आँसू गैस और फोर्स पर फोर्स भेज रहे हैं। यह सब देखकर कह रही हूँ, कि तू नीचों से भी नीचा है। अब तो जागो, भारत के वासी, ये चुप रहने का नतीजा है। जागो, जागो भारत के लोगों, अब माँ भारती ने चीख मारी है। जो देख रहे हो यह हाहाकार, ये चुप रहने का नतीजा है। — कविता : अंजलि पांडेय