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“वो तो बस मुस्कुराकर घर से निकलते हैं, क्या हम उनकी सुरक्षा के प्रति निश्चिंत हो सकते हैं?”

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी
एक अभिभावक के रूप में, हमारा सबसे बड़ा सपना अपने बच्चे की मुस्कान को सुरक्षित देखना होता है। सुबह स्कूल जाते समय और दोपहर में घर वापस आते समय, हमारे मासूम बच्चे जिस वाहन में बैठते हैं, क्या हमने कभी सोचा है कि उन हाथों में उनकी जान कितनी सुरक्षित है?
ऑल राजस्थान अभिभावक महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष कैप्टन डॉ. ठाकुर दिनेश सिंह भदौरिया ने एक बहुत ही मार्मिक और आवश्यक अपील जारी की है। यह किसी वाहन चालक या स्कूल प्रबंधन के खिलाफ नहीं, बल्कि उन नन्हे-मुन्नों के जीवन को बचाने की एक पुकार है।
हमारी जिम्मेदारी, हमारी सतर्कता:
अनजान खतरा: यह दुखद है कि कुछ वाहन चालक नशे की हालत में बच्चों को लाते-ले जाते हैं। नशे में धुत, लहराते हुए वाहन और मासूमों का जीवन—यह कल्पना ही रोंगटे खड़े कर देने वाली है।
ओवरलोडिंग की क्रूरता: छोटी-छोटी सीटों पर ठूंस-ठूंस कर भरे गए बच्चे, किसी आपदा का संकेत हैं। एक छोटी सी चूक उनकी पूरी दुनिया बदल सकती है।
हमारा संकल्प: क्या हमें यह नहीं देखना चाहिए कि जिस चालक के भरोसे हम अपने जिगर के टुकड़ों को भेज रहे हैं, उसका स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति कैसी है?
हमारा विनम्र आग्रह:
अभिभावकों से: अपने बच्चों से पूछें, उनसे बात करें। यदि चालक का व्यवहार या ड्राइविंग आपको सामान्य न लगे, तो चुप न रहें। आपकी एक छोटी सी जागरूकता किसी की जान बचा सकती है।
स्कूल प्रबंधन से: आप सिर्फ शिक्षा के केंद्र नहीं, सुरक्षा के प्रहरी भी हैं। अपनी जिम्मेदारी को समझें और ऐसे चालकों की सख्त जांच करें जो बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
प्रशासन से: यातायात पुलिस से हमारा निवेदन है कि इन स्कूली वाहनों को अपनी प्राथमिकता में रखें। किसी भी ‘नशे’ की गंध को भी न पनपने दें।
याद रखें: वे बच्चे हमारे भविष्य की धरोहर हैं। उनकी सुरक्षा के लिए किया गया आपका एक सवाल, आपका एक कदम, उनके सुरक्षित भविष्य की गारंटी है।
आइए, मिलकर सुरक्षा का एक ऐसा कवच बनाएं कि कोई भी मासूम किसी भी हादसे का शिकार न हो।
जनहित में जारी – कैप्टन डॉ. ठाकुर दिनेश सिंह भदौरिया (प्रदेश अध्यक्ष, ऑल राजस्थान अभिभावक महासंघ)
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