बालोतराब्रेकिंग न्यूज़राजस्थान
युग प्रधान आचार्य श्री तुलसी की 30 वीं पुण्यतिथि
विलक्षण महापुरुष थे आचार्य तुलसी - प्रोफेसर साध्वी मंगल प्रज्ञा

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग
जसोल – प्रोफेसर डॉ. साध्वी मंगल प्रज्ञा के सान्निध्य में आचार्य श्री तुलसी की 30 वीं वार्षिक पुण्यतिथि स्थानीय राजा चौक स्तिथ नया ओसवाल भवन, जसोल में “श्रद्धा समर्पण समारोह” के रूप में आयोजित हुई। इस अवसर पर उपस्तिथ धर्म परिषद को सम्बोधित करते हुए प्रोफेसर डॉ. साध्वी ने कहा कि – गुरुदेव तुलसी का व्यक्तित्व समुद्र की तरह अमाप्य था, विलक्षण था। शब्दो के तराजू से अथाय गुण सागर को नही मापा जा सकता।उस चांद से संघ गगन में अनेक चितारे चमकाए, जन जन के जीवन को रोशन किया, विकास के जीवन को सोपान पर चढ़ने के लिए मोटिवेट किया। उनका साहस और मोटिवेशन पॉवर बेजोड़ था। परिस्तिथियों से कभी हार नही मानी। उनका चुम्बकीय व्यक्तित्व देश विदेश के लाखों लाखों मानव मन का आधार बना, श्रद्धा का केंद्र बना।
इस अवसर पर श्रमण श्रेणी में की गई देश विदेशो की यात्रा के अनुभव साझा करते हुऐ अनेक घटना प्रसंगों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा- उस महापुरुष की निकट सान्निध्य में रहकर शिक्षा प्राप्त की और उपासना का अवसर मिला, ये मेरा शौभाग्य है।लाखो लाखो जन मानस की तकदीर बदलने वाले पुण्य पुरोधा तुलसी सदेही भले ही हमारे मध्य नही है, पर उनके अवदान, प्रेरणा, मागदर्शन, अमर वरदान के रूप में हमें प्राप्त है। आवश्यकता है हमें श्रद्धा ओर समर्पण की चेतना से संघ संवर्धन में योगभूत बने। हौसले बुलंद रखें।
जसोल तेरापन्थ महिला मंडल की बहिनो के मंगल श्रद्धागीत से कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। साध्वी डॉ. शौर्यप्रभा जी ने कहा – आचार्य तुलसी की दिव्य दृष्टि अनुपमेंय थी। उनकी पारखी दृष्टि ने अनेक व्यक्तित्वों का निर्माण किया। जागरण का संदेश दिया। जाग्रति का जीवन जिया।
इस अवसर पर तेरपंथ सभा जसोल अध्यक्ष गौतमचन्द ढ़ेलडिया, जसोल ज्ञानशाला प्रभारी डूंगरचन्द सालेचा, महासभा जोधपुर आंचलिक प्रभारी गौतमचन्द सालेचा, अणुव्रत समिति मंत्री सफरु खान, पूर्व तेयुप अध्यक्ष प्रवीण भंसाली ने श्रद्धासिक्त विचार व्यक्त किये। गुरुदेव श्री तुलसी के प्रति श्रद्धा भाव व्यक्त किये। साध्वी सुदर्शन प्रभा जी, सुरेश डोसी, कुमारपाल संखलेचा, कवि अशोक प्रदीप ने गीतांजलि द्वारा अपनी श्रद्धा समर्पित की। उक्त जानकारी तेरापन्थ सभा संगठन मंत्री जयंतीलाल जीरावला ने दी कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. साध्वी राजुल प्रभा जी ने किया।

Subscribe to my channel


