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राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र, बीकानेर ने 43वाँ स्थापना दिवस मनाया

ऊँट संरक्षण एवं उद्यमिता से विकसित भारत के संकल्प को मिलेगी नई गति : डॉ. सतीश पूनिया

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी

 

बीकानेर, 05 जुलाई, 2026 । भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी), बीकानेर ने आज अपना 43वाँ स्थापना दिवस उत्साह एवं गरिमा के साथ मनाया। इस अवसर पर “उष्ट्र संरक्षण एवं उद्यमिता विकास : विकसित भारत–2047 की दिशा में” विषय पर राष्ट्रीय किसान संगोष्ठी एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें करीब 400 की संख्‍या में किसानों, पशुपालकों, वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों, विद्यार्थियों तथा एनआरसीसी सहित आईसीएआर के बीकानेर स्थित संस्‍थानों/केन्‍द्रों के अधिकारियों/कर्मचारियों, गणमान्‍य जनों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय राज्यसभा सांसद डॉ. सतीश पूनिया थे।

ऊँट केवल पशु नहीं, हमारी संस्कृति और अर्थव्यवस्था का आधार है : डॉ. सतीश पूनिया

मुख्य अतिथि डॉ. सतीश पूनिया ने कहा कि वे राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र में ऊँट की विलक्षणताओं को निकट से समझने की जिज्ञासा लेकर आए हैं। उन्होंने कहा कि यहाँ आकर उन्होंने अनुभव किया कि ऊँट केवल मरुस्थल का जहाज़ नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भर जीवन का सशक्त आधार है।

उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी जैसे कठिन दौर में भारतीय कृषि ने देश की अर्थव्यवस्था को संभाला। उसी प्रकार ऊँट भी विपरीत परिस्थितियों में धैर्य, सहनशीलता और जीवटता का अद्वितीय प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ऊँटों की तेजी से घटती संख्‍या चिंता का विषय जरूर है परंतु इस पशु की बहुआयामी उपादेयता के कारण यह आज भी प्रासंगिक है, हमें अपनी मरुस्थलीय संस्कृति, खेजड़ी और पारंपरिक धरोहर को सुरक्षित रखना है, तो ऊँट संरक्षण को जन-आंदोलन बनाना होगा। उन्होंने ऊँटनी के दूध से निर्मित मूल्य संवर्धित नूतन उत्पाद ‘राजभोग आइसक्रीम’ को लॉन्‍च किया तथा इसकी सराहना करते हुए कहा कि ऊँटनी के दूध में अपार पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी संभावनाएँ हैं। उन्होंने इस क्षेत्र में और व्यापक अनुसंधान की आवश्यकता पर बल देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि भारत सरकार, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अधीनस्‍थ राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र के संयुक्त प्रयासों से ऊँट संरक्षण को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने स्वयं भी इस अभियान के सक्रिय सहभागी बनने तथा सभी को ‘एक ऊँट मेरे नाम’ के संकल्प हेतु प्रोत्‍साहित किया।

विशिष्ट अतिथि राजुवास, बीकानेर के कुलगुरू डॉ. सुमन्त व्यास ने कहा कि ऊँट संरक्षण तभी सफल होगा, जब ऊँट पालकों की आजीविका को भी सुदृढ़ बनाया जाएगा। उन्होंने ऊँट आधारित उद्यमिता, ऊँट गाड़ा जैसे पारंपरिक साधनों हेतु ऋण सुविधा उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि नीति स्तर पर सकारात्मक पहल से ऊँट पालन पुनः लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित होगा, ऊँट पालको को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना समय की मांग है।

केन्द्र के निदेशक एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने “एनआरसीसी : विगत उपलब्धियाँ एवं भावी कार्ययोजना” विषय पर प्रस्तुतीकरण देते हुए कहा कि ऊँट संरक्षण का सबसे सशक्त माध्यम ऊँट पालकों का सशक्तीकरण है। उन्होंने ऊँटनी के दूध को “रेगिस्तान की डेयरी” बताते हुए इसके मूल्य संवर्धन, वैज्ञानिक अनुसंधान, जन-जागरूकता तथा ‘आई लव कैमल मिल्क’ अभियान को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एनआरसीसी ऊँट आधारित उद्यमिता, वैज्ञानिक नवाचार तथा किसानों की आय वृद्धि के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने केन्द्र परिसर में एनआरसीसी स्थापना स्मृति स्तम्भ का अनावरण किया। इसके पश्चात “मरुस्थल से आकाश तक : एनआरसीसी के 43 वर्ष” थीम पर गुब्बारों का विमोचन किया तथा वृक्षारोपण किया। उन्होंने उष्ट्र संग्रहालय का भ्रमण कर ऊँटनी के दूध से निर्मित मूल्य संवर्धित उत्पादों, उष्ट्र बाल, चमड़ा एवं अन्य वैज्ञानिक प्रौद्योगिकियों पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। समारोह के दौरान ‘आई लव कैमल मिल्क’ अभियान को भी प्रोत्साहित किया गया।

समारोह का शुभारम्भ किसान–वैज्ञानिक संवाद से हुआ, जिसमें वैज्ञानिकों ने किसानों एवं पशुपालकों को उन्नत कृषि एवं पशुपालन तकनीकों, उष्ट्र स्वास्थ्य, पोषण, मूल्य संवर्धन तथा उद्यमिता विकास से संबंधित वैज्ञानिक जानकारी प्रदान की। इस अवसर पर केन्द्र के नवीन प्रकाशन का विमोचन किया गया तथा अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत किसानों को कृषि आदानों का वितरण किया गया तथा केन्द्र के संविदा आधारित सहायक कार्मिकों को सम्मानित किया गया।

केन्द्र के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी श्री अखिल ठुकराल ने भी मंच साझा किया.

कार्यकम के अंत में आयोजन सचिव डॉ. राकेश रंजन ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, वैज्ञानिकों, किसानों, अधिकारियों, कर्मचारियों, मीडिया प्रतिनिधियों तथा आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी व्यक्तियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के सह आयोजक डॉ. प्रियंका गौतम एवं डॉ. श्‍याम सुंदर चौधरी ने रूपरेखा तैयार की एवं मंच संचालन श्री नेमीचंद बारासा ने किया। राष्ट्र गीत एवं सामूहिक छायाचित्र के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। इसके उपरांत मुख्य अतिथि ने उष्ट्र संग्रहालय एवं उष्‍ट्र तकनीकी प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

Dr Ram Dayal Bhati

Editor Rajasthan Mobile Number 97848 14914

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