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सेना प्रमुख ने डॉ. शिखा गर्ग को ‘वेटरन अचीवर्स अवॉर्ड’ से किया सम्मानित, समाज सेवा के लिए मिला प्रतिष्ठित सम्मान

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी
जयपुर। भारतीय सेना में एक चिकित्सक के रूप में उत्कृष्ट सेवाएं देने के बाद भी समाज सेवा के प्रति निरंतर समर्पित रहने वाली लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) डॉ. शिखा गर्ग को उनके उल्लेखनीय सामाजिक योगदान के लिए सेना प्रमुख द्वारा प्रतिष्ठित ‘वेटरन अचीवर्स अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनकी निस्वार्थ सेवा, समर्पण और मानव कल्याण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
डॉ. शिखा गर्ग ने भारतीय सेना में चिकित्सक के रूप में अपनी सेवाओं के दौरान हजारों सैनिकों और नागरिकों के स्वास्थ्य संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने समाज सेवा को अपना मिशन बनाते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में लगातार कार्य जारी रखा।
वर्ष 2021 से वह शौर्य सेवा संस्थान के माध्यम से सावित्रीबाई फुले पाठशाला, बाबा रामदेव नगर, कच्ची बस्ती, गुर्जर की थड़ी, जयपुर में आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित बच्चों की शिक्षा को प्रायोजित कर रही हैं। अपने समय, श्रम और आर्थिक सहयोग से उन्होंने करीब 50 बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य किया है। उन्होंने कचरा बीनने वाले बच्चों के हाथों में किताबें थमाकर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा तथा कई बच्चों की फीस प्रायोजित कर उन्हें ज्ञानदीप पब्लिक स्कूल, मानसरोवर, जयपुर में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर भी उपलब्ध कराया।
इसके अलावा डॉ. शिखा गर्ग कृष्णा चैरिटेबल फाउंडेशन की सक्रिय सदस्य के रूप में भी समाज सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। संस्था के माध्यम से वर्ष 2015 में चुगान स्टेडियम में दिव्यांग क्रिकेट खिलाड़ियों के लिए व्हीलचेयर क्रिकेट प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया। वर्तमान में वह शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए लगातार कार्यरत हैं।
डॉ. शिखा गर्ग का मानना है कि सच्ची सेवा वही है, जो बिना किसी स्वार्थ और अपेक्षा के की जाए। यही भावना उनके प्रत्येक सामाजिक कार्य में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
सेना प्रमुख के हाथों प्राप्त ‘वेटरन अचीवर्स अवॉर्ड’ केवल डॉ. शिखा गर्ग की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन सभी पूर्व सैनिकों के लिए भी गर्व और सम्मान का विषय है, जो वर्दी उतारने के बाद भी राष्ट्र और समाज की सेवा में निरंतर अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं।

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