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प्राकृतिक खेती अपनाकर किसान बनें आत्मनिर्भर: विवेकानंद मिश्र

बस्ती से वेदान्त सिंह
बस्ती, 19 जून 2026। किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करने एवं कृषि को अधिक लाभकारी तथा पर्यावरण-अनुकूल बनाने के उद्देश्य से भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी प्रेक्षागृह में प्राकृतिक खेती कार्यशाला एवं जन-जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों, कृषि विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों तथा ग्रामीण नागरिकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा जिलाध्यक्ष विवेकानंद मिश्र ने की, जबकि उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश शुक्ला मुख्य रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए प्राकृतिक एवं गौ-आधारित खेती के लाभों की जानकारी देना था।
अपने संबोधन में जिलाध्यक्ष विवेकानंद मिश्र ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल कृषि का नहीं बल्कि स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण का भी विषय है। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ते रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के प्रयोग से भूमि की उर्वरता प्रभावित हो रही है और मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। ऐसे समय में प्राकृतिक खेती किसानों के लिए एक सशक्त विकल्प बनकर उभरी है।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार किसानों के हित में लगातार कार्य कर रही है तथा 20 जून को किसान सम्मान निधि की अगली किस्त किसानों के खातों में भेजी जाएगी। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाकर आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
एमएलसी प्रतिनिधि हरीश सिंह ने कहा कि सरकार का प्रयास किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित करना है। उन्होंने जैविक खाद के उपयोग और गौवंश संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं ब्लॉक प्रमुख यशकांत सिंह ने कहा कि स्वस्थ जीवन और सशक्त भारत के निर्माण के लिए प्राकृतिक खेती को अपनाना आवश्यक है।
कार्यशाला में कृषि विशेषज्ञों ने प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। विशेषज्ञों ने जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, आच्छादन और वाफसा जैसी तकनीकों की उपयोगिता बताते हुए कहा कि स्थानीय संसाधनों और गोवंश आधारित उत्पादों के माध्यम से कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
वक्ताओं ने बताया कि प्राकृतिक खेती किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्राकृतिक पद्धति से उत्पादित फसलों की बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है।
कार्यक्रम के दौरान प्रगतिशील किसानों को बीज किट एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। सांस्कृतिक विभाग की ओर से लोकनृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियां भी दी गईं।
इस अवसर पर विधायक प्रतिनिधि कप्तानगंज गुलाब चंद्र सोनकर, हर्रैया के सरोज मिश्र, सदर के मो. सलीम, भाजपा किसान मोर्चा के दिलीप पांडेय, संयुक्त कृषि निदेशक राम बचन राम, उप कृषि निदेशक अशोक कुमार, जिला कृषि अधिकारी डॉ. बी.आर. मौर्य, जिला कृषि रक्षा अधिकारी रतन शंकर ओझा, भूमि संरक्षण अधिकारी सुदीप वर्मा, वैज्ञानिक डॉ. विनोद बहादुर सिंह, डॉ. अंजली वर्मा सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

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