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बस्ती में वीर सावरकर जयंती पर गूंजे राष्ट्रवाद के स्वर-आर्य समाज और आर्य वीर दल ने किया नमन

बस्ती 28 मई।
*बस्ती में वीर सावरकर जयंती पर गूंजे राष्ट्रवाद के स्वर-आर्य समाज और आर्य वीर दल ने किया नमन*
महान क्रांतिकारी, ओजस्वी विचारक और राष्ट्रभक्त विनायक दामोदर ‘वीर’ सावरकर की जयंती के पावन अवसर पर बस्ती में राष्ट्रप्रेम का अनूठा दृश्य देखने को मिला। आर्य समाज और आर्य वीर दल के संयुक्त तत्वावधान में सावरकर जी के बलिदान और त्याग को श्रद्धापूर्वक याद किया गया और यज्ञ की आहुतियों से पवित्र वातावरण हुआ।
इस पुनीत कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण गरुण ध्वज पाण्डेय योगाचार्य, भारत स्वाभिमान ट्रस्ट, हरिद्वार यूनिट बस्ती के सानिध्य में संपन्न हुआ भव्य यज्ञ रहा। गरुण ध्वज पाण्डेय ने विधि-विधान से यज्ञ संपन्न कराते हुए वीर सावरकर के ‘हिंदुत्व’ और ‘राष्ट्र-धर्म’ के सिद्धांतों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सावरकर का जीवन केवल एक इतिहास नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रभक्ति का एक महाग्रंथ है।
इस अवसर पर उपस्थित नवल किशोर चौधरी कोषाध्यक्ष, भारत स्वाभिमान ट्रस्ट, बस्ती ने कहा कि सावरकर जी ने अंडमान की यातनाएं केवल इसलिए सही थीं ताकि भारत स्वतंत्र हो सके। उनका जीवन हमें सिखाता है कि राष्ट्र सर्वोपरि है और व्यक्तिगत सुख-दुख से ऊपर उठकर देश के लिए समर्पित होना ही सच्ची सेवा है।
शिक्षक अनूप कुमार त्रिपाठी ने सावरकर जी के क्रांतिकारी विचारों की सराहना करते हुए कहा कि आज भारत को सावरकर जैसे प्रखर राष्ट्रवादियों की वैचारिक चेतना की आवश्यकता है, ताकि हम अपनी संस्कृति और अस्मिता को सुरक्षित रख सकें।
शिक्षक नितीश कुमार ने कहा कि उन्होंने सावरकर के सामाजिक सुधारों और छुआछूत विरोधी आंदोलनों पर चर्चा की। बताया कि सावरकर एक क्रांतिकारी होने के साथ-साथ एक महान समाज सुधारक भी थे, जिन्होंने समाज को जोड़ने का ऐतिहासिक कार्य किया।
भारतवासियों को संदेश
कार्यक्रम के अंत में सभी वक्ताओं ने एक स्वर में समस्त भारतवासियों को वीर सावरकर जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपील की कि सावरकर के ‘स्वतंत्र, सशक्त और स्वाभिमानी भारत’ के सपने को पूरा करने के लिए हम सभी को एकजुट होकर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देना चाहिए।
इस अवसर पर आर्य समाज के कार्यकर्ताओं सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने राष्ट्रभक्त वीर सावरकर के चित्र पर माल्यार्पण कर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया
गरुण ध्वज पाण्डेय

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