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21वीं सदी में एक्यूप्रेशर एवं कलर चिकित्सा बनी आसान उपचार पद्धति

रंगों की ऊर्जा से घर बैठे पाएँ स्वास्थ्य लाभ : विशेषज्ञ डॉ. नवीन सिंह 

बस्ती से वेदान्त सिंह

 

बस्ती। आस्था आयुर्वेदिक एक्यूप्रेशर हॉलिस्टिक ट्रीटमेंट एंड ट्रेनिंग सेंटर कटेश्वर पार्क के निदेशक प्रो. डॉ. नवीन सिंह ने बताया कि आधुनिक जीवनशैली, बढ़ता तनाव, अनियमित खान-पान और दवाइयों पर बढ़ती निर्भरता के बीच अब लोग प्राकृतिक एवं वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। 21वीं सदी में एक्यूप्रेशर चिकित्सा के साथ “कलर थेरेपी” अर्थात रंग चिकित्सा एक सरल, सुरक्षित और प्रभावी उपचार पद्धति के रूप में उभर रही है, जिसके माध्यम से लोग घर बैठे अनेक शारीरिक एवं मानसिक समस्याओं से राहत पा सकते हैं।

विशेषज्ञ डॉ नवीन सिंह के अनुसार मानव शरीर केवल मांस और हड्डियों का ढांचा नहीं, बल्कि ऊर्जा का एक जीवंत केंद्र है। शरीर में उपस्थित ऊर्जा चक्रों और नसों के संतुलन को बनाए रखने में रंगों की विशेष भूमिका होती है। अलग-अलग रंग शरीर और मन पर अलग प्रकार का प्रभाव डालते हैं। यही सिद्धांत कलर चिकित्सा का आधार है।

क्या है कलर चिकित्सा?

कलर चिकित्सा एक प्राकृतिक उपचार पद्धति है जिसमें विभिन्न रंगों की किरणों, प्रकाश, वस्त्रों, जल, भोजन अथवा मानसिक एकाग्रता के माध्यम से शरीर में संतुलन स्थापित किया जाता है। माना जाता है कि प्रत्येक रंग विशेष प्रकार की ऊर्जा उत्पन्न करता है जो शरीर के विभिन्न अंगों और चक्रों को प्रभावित करती है।

कौन-सा रंग किस रोग में लाभकारी?

लाल रंग – शरीर में ऊर्जा और रक्तसंचार बढ़ाने में सहायक

नीला रंग – मानसिक शांति, अनिद्रा और तनाव कम करने में उपयोगी

हरा रंग – हृदय एवं मानसिक संतुलन के लिए लाभकारी

पीला रंग – पाचन शक्ति और आत्मविश्वास बढ़ाने में सहायक

नारंगी रंग – उत्साह एवं सकारात्मकता प्रदान करता है

बैंगनी रंग – ध्यान, आध्यात्मिकता और मानसिक एकाग्रता में सहायक माना जाता है

एक्यूप्रेशर और रंग चिकित्सा का संयुक्त प्रभाव

विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि एक्यूप्रेशर बिंदुओं पर रंगों का प्रयोग किया जाए तो उपचार की प्रभावशीलता और बढ़ जाती है। शरीर के विशेष बिंदुओं पर रंगीन चुंबक, प्रकाश या रंगीन टेप का उपयोग कर ऊर्जा प्रवाह को संतुलित किया जाता है। इससे सिरदर्द, तनाव, अनिद्रा, गैस, जोड़ों का दर्द, थकान और मानसिक अशांति जैसी समस्याओं में लाभ देखा गया है।

घर बैठे कैसे करें आसान प्रयोग?

अपने कमरे में हल्के और सकारात्मक रंगों का प्रयोग करें

सुबह सूर्य की हल्की किरणों का सेवन करें

रंगों के अनुसार वस्त्र पहनें

ध्यान करते समय शांत रंगों पर ध्यान केंद्रित करें

रंगीन पानी चिकित्सा का उपयोग विशेषज्ञ की सलाह से करें

एक्यूप्रेशर बिंदुओं पर रंगीन टेप या प्रकाश का प्रयोग करें

दवा नहीं, संतुलन पर आधारित चिकित्सा

विशेषज्ञों का कहना है कि कलर चिकित्सा का उद्देश्य केवल रोग हटाना नहीं, बल्कि शरीर, मन और भावनाओं के संतुलन को स्थापित करना है। यह चिकित्सा बिना किसी दुष्प्रभाव के प्राकृतिक तरीके से स्वास्थ्य सुधारने में सहायक मानी जाती है।

बढ़ रही लोगों की रुचि

आजकल योग, प्राकृतिक चिकित्सा और वैकल्पिक उपचार पद्धतियों के बढ़ते प्रभाव के कारण युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक में कलर चिकित्सा के प्रति रुचि बढ़ रही है। कई लोग इसे तनाव मुक्ति, मानसिक शांति और जीवनशैली सुधार के लिए अपना रहे हैं।

विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि गंभीर रोगों में किसी भी वैकल्पिक चिकित्सा को अपनाने से पहले प्रशिक्षित चिकित्सक या विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। सही मार्गदर्शन में कलर चिकित्सा स्वास्थ्य संवर्धन का प्रभावी माध्यम बन सकती है।

Vedant Singh

Vedant Singh S/O Dr. Naveen Singh Mo. Belwadandi Po. Gandhi Nagar Basti Pin . 272001 Mob 8400883291 BG . O Positive vsvedant12345@gmail.com

Vedant Singh

Vedant Singh S/O Dr. Naveen Singh Mo. Belwadandi Po. Gandhi Nagar Basti Pin . 272001 Mob 8400883291 BG . O Positive vsvedant12345@gmail.com

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