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जीडीसी मेंढर ने रचा इतिहास, सीएसबी बेंगलुरु के प्रशिक्षण से पहली बार सफल हुआ रेशम कीट उत्पादन

संवाददाता अमरजीत सिंह, पुंछ

 

मेंढर/पुंछ, 26 मई 2026: सीमावर्ती क्षेत्र पुंछ के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि के तहत श्री छोटे शाह राजकीय डिग्री कॉलेज (GDC) मेंढर ने पहली बार वसंत ऋतु में रेशम कीट (Silkworm) की सफल फसल तैयार की है। यह उपलब्धि कॉलेज में व्यावसायिक प्रशिक्षण और स्वरोजगार आधारित शिक्षा की दिशा में एक बड़ी पहल मानी जा रही है।

यह सफलता 24-25 मार्च 2026 को आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम “कॉलेज छात्रों के लिए सेरी-बिजनेस अवसर” का प्रत्यक्ष परिणाम है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को Central Silk Board द्वारा प्रायोजित किया गया था। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. सिद्दीक अली अहमद, साइंटिस्ट-डी एवं हेड, कैपेसिटी बिल्डिंग एंड ट्रेनिंग डिवीजन, सीएसबी बेंगलुरु द्वारा किया गया। इस दौरान सीएसबी के पांच विशेषज्ञ वैज्ञानिकों ने आधुनिक रेशम पालन तकनीकों और स्वरोजगार के अवसरों पर विस्तृत जानकारी दी।

प्रशिक्षण के बाद कॉलेज के छात्रों ने उत्साहपूर्वक लगभग 50 डिजीज-फ्री लेइंग्स (DFLs) का पालन शुरू किया। प्रशिक्षण से मिली जानकारी का प्रभाव तुरंत देखने को मिला, जहां छात्रों ने रेशम कीटों की देखभाल, निगरानी और प्रबंधन में विशेष रुचि दिखाई और पूरे पालन चक्र को सफलतापूर्वक पूरा किया।

सफल उत्पादन के समापन पर सीएसबी-रीजनल सेरिकल्चरल रिसर्च स्टेशन मीरां साहिब जम्मू की साइंटिस्ट-बी डॉ. रुबिया बुखारी ने कॉलेज पहुंचकर कोकून सॉर्टिंग का विशेष प्रदर्शन किया। उन्होंने उच्च गुणवत्ता वाले कोकून की पहचान और बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त करने की तकनीकों की जानकारी दी।

इस पूरी पहल में कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. मोहम्मद आजम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने लगातार फोन पर मार्गदर्शन देने के साथ-साथ कई बार रियरिंग यूनिट का दौरा कर छात्र टीम का उत्साहवर्धन किया।

कॉलेज के वर्तमान प्राचार्य डॉ. शौकत हुसैन ने इस ऐतिहासिक सफलता पर पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने Central Silk Board और राज्य रेशम विकास विभाग (SSDD) का सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही डॉ. रुबिया बुखारी, डॉ. हरजीत सिंह, श्री अमजद, डॉ. सरशद हुसैन (आईक्यूएसी हेड) तथा प्राणी विज्ञान विभाग के श्री इनाम-उल-हक के योगदान की सराहना की।

डॉ. शौकत हुसैन ने कहा कि यह उपलब्धि सिर्फ शुरुआत है। भविष्य में कॉलेज और अधिक व्यवस्थित तरीके से रेशम पालन परियोजनाओं को आगे बढ़ाएगा ताकि छात्रों में कौशल विकास, नवाचार और उद्यमिता की भावना को मजबूत किया जा सके।

जीडीसी मेंढर की यह ऐतिहासिक सफलता साबित करती है कि सीमावर्ती क्षेत्रों के शैक्षणिक संस्थान भी व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से छात्रों को आत्मनिर्भर और रोजगारोन्मुख बना सकते हैं।

Viyasmani Tripaathi

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