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माँ: जीवन की प्रथम गुरु और सबसे बड़ी शक्ति

माँ का स्नेह, त्याग और संस्कार ही व्यक्ति के जीवन को बनाते हैं सफल — प्रो. डॉ. नवीन सिंह

बस्ती से वेदान्त सिंह

 

बस्ती। माँ का स्थान संसार में सबसे ऊँचा और पूजनीय माना गया है। माँ केवल जन्म देने वाली नहीं होती, बल्कि वह अपने बच्चों की पहली गुरु, सच्ची मित्र, मार्गदर्शक और संरक्षक भी होती हैं। माँ अपने स्नेह, त्याग और संस्कारों से बच्चों के व्यक्तित्व का निर्माण करती हैं तथा उन्हें जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करती हैं।

यह विचार प्रो. डॉ. नवीन सिंह, राष्ट्रीय महासचिव, विश्व संवाद परिषद योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा प्रकोष्ठ, भारत ने व्यक्त करते हुए कहा कि माँ का प्रेम निस्वार्थ और बेशर्त होता है। वह अपने बच्चों के सुख-दुख में सदैव साथ खड़ी रहती हैं और हर परिस्थिति में उनका हौसला बढ़ाती हैं। माँ अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए स्वयं कष्ट सहकर भी उन्हें बेहतर जीवन देने का प्रयास करती हैं।

उन्होंने कहा कि माँ की उपस्थिति जीवन को उद्देश्य, ऊर्जा और सकारात्मक दिशा प्रदान करती है। माँ के संस्कार ही बच्चों को अच्छे-बुरे का अंतर समझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समाज और परिवार की मजबूती में भी माँ की भूमिका सबसे अहम होती है।

प्रो. डॉ. नवीन सिंह ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह अपनी माँ का सम्मान करे, उनकी भावनाओं को समझे तथा उनके प्रति प्रेम और आभार व्यक्त करे। माँ की सेवा और देखभाल से बढ़कर कोई दूसरा धर्म नहीं हो सकता।

Vedant Singh

Vedant Singh S/O Dr. Naveen Singh Mo. Belwadandi Po. Gandhi Nagar Basti Pin . 272001 Mob 8400883291 BG . O Positive vsvedant12345@gmail.com

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