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बालकों में धार्मिक संस्कार एवं भारतीय सनातन संस्कृति जागरूकता हेतु कक्षाओं के आयोजन के संबंध में निर्देश

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी

 

श्री सतगुरु देवाय नमः

                दिनांक 25-04-2026 ई

बालकों में धार्मिक संस्कार एवं भारतीय सनातन संस्कृति जागरूकता हेतु कक्षाओं के आयोजन के संबंध में निर्देश

   सनातन धर्म विश्व का सबसे प्राचीन एवं गौरवशाली धर्म है,जो हमारी हिंदू सभ्यता व संस्कृति की आधारशिला है। आज के भौतिक चकाचौंध के युग में देखा जा रहा है कि हम अपनी सनातन सभ्यता एवं संस्कृति से दूर होते चले जा रहे हैं। इसका मूल कारण है हम अपने सनातन धर्म एवं संस्कारों को भूल गए हैं तथा पाश्चात्य संस्कृति की ओर अनायास ही बढ़ते चले जा रहे हैं,जो पतन का मार्ग है।

   आज की नई पीढ़ी को पुन: अपने सनातन धर्म सभ्यता एवं संस्कृति की ओर आकर्षित कर उन्हें सन्मार्ग की ओर प्रेरित करने हेतु अनंत श्री सुखराम जी रामस्नेही सम्प्रदाय के सभी केंद्रों में ‘अनंत श्री जुगतेश्वर जी महाराज प्रबोधन केंद्र’ की व्यवस्था कर तत्संबंधी कक्षाएं लगाई जा रही हैं। अतः सभी रामस्नेहियों से अनुरोध है कि वे अपने ३ से १२ तथा १३ से २५ वर्ष तक के सभी बालकों को ‘सतगुरु श्री जुगतेश्वर जी महाराज प्रबोधन ‘ में अवश्य भेजें। ये कक्षाएं रविवार को लगाई जाती हैं।

   रामस्नेही धर्म भी सनातन धर्म की ही एक प्रमुख शाखा है जो किसी न किसी रूप में अनादिकाल से चला आ रहा है। सतयुग से त्रेतायुग तक ऋषभदेव जी सहित २४ तीर्थंकरों, कलयुग में महात्मा कबीर, नामदेव जी, दादू जी, दरियाव जी एवं अनेक संत महात्माओं ने निर्गुण निराकार परमात्मा की भक्ति द्वारा जन सामान्य के लिए परममोक्ष का पथ प्रशस्त किया है। अनन्त श्री सुखराम जी रामस्नेही सम्प्रदाय का प्रारम्भ सतगुरु श्री सुखराम जी महाराज के अनुभव ज्ञान द्वारा हुआ है। उनके बाद भी अनेक केवलीजन सतगुरु महात्माओं ने इस सम्प्रदाय को सुशोभित कर अनन्त जीवों के लिए परममोक्ष का पथ प्रशस्त किया है एवं आज भी कर रहे हैं।

   प्राय: यह देखा जाता है कि कई पीढ़ियों से इस रामस्नेही धर्म को अपनाते चले आ रहे अभिभावक भी अपने बालकों को इस धर्म के विषय में ठीक से नहीं समझा पाते। अतएव इन कक्षाओं के आयोजन का उद्देश्य बालकों को रामस्नेही धर्म के महात्म्य, पराक्रम एवं केवली जन सतगुरु महात्माओं की महिमा के विषय में सरल रूप से समझा कर इस धर्म के प्रति रुचि उत्पन्न करना, बालकों की जिज्ञासाओं को शांत करना तथा उनके धार्मिक भावों में प्रगाढ़ता लाना है। अतः ये कक्षाएं लेने वाले सभी शिक्षकों से अनुरोध है कि वे बालकों को हमारे साधु-संतों एवं ऋषि- मुनियों द्वारा सनातन धर्म का प्रचार एवं रक्षा के लिए किए गए कार्यों से परिचित कराएं तथा देश के महान् वीरों तथा स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन, उनके त्याग,बलिदान और आदर्शों की प्रेरक कथाएं सुनाएं जिससे वे उनसे प्रेरणा ले कर अपने जीवन में नैतिकता, अनुशासन एवं देश भक्ति के गुणों को आत्मसात् कर सकें ।

   अतः सभी से अपेक्षा है कि आप इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाते हुए एक सशक्त एवं संस्कारित पीढ़ी के निर्माण में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान देंगे।

– B. L. Chandak

 

Dr Ram Dayal Bhati

Editor Rajasthan Mobile Number 97848 14914

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