बीकानेरब्रेकिंग न्यूज़राजस्थान
उष्ट्र संरक्षण हेतु एनआरसीसी व बीआरसी ने लगाई मिलकर दौड़

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी
बीकानेर, 26 अप्रैल 2026 । उष्ट्र संरक्षण के उद्देश्य से आज अलसुबह भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी) एवं बीकानेर रन क्लब (बीआरसी) के संयुक्त तत्वावधान में एनआरसीसी प्रवेश द्वार से कृषि वानिकी परिक्षेत्र तक ‘रन फॉर कैमल (उष्ट्र सरंक्षण के लिए दौड़)’ विषयक एक प्रतीकात्मक दौड़ आयोजित की गई। इसमें केन्द्र स्टाफ सहित बीआरसी के लगभग 400 युवाओं एवं गणमान्य जनों ने “हर कदम की एक ही पुकार, ऊँट बचाओ, यही है सार।” के गुंजायमान स्लोगन के साथ उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।
इस अवसर पर केन्द्र के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने कहा कि मरुस्थलीय क्षेत्रों में मानव सभ्यता के विकास में ऊँट प्रजाति का योगदान सदैव अद्वितीय रहा है। यद्यपि वैश्विक स्तर पर ऊँटों की संख्या में वृद्धि दर्ज की जा रही है, किन्तु देश में इनकी निरंतर गिरती संख्या गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि बदलते परिवेश में ऊँट की बहुआयामी उपयोगिताएँ जैसे कि ऊँटनी का औषधीय गुणों से युक्त दूध, उष्ट्र-आधारित पर्यावरणीय पर्यटन तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण से एक प्रकार की “चलती-फिरती फार्मेसी” के रूप में इसकी विशिष्टता, इसे आज भी अत्यंत प्रासंगिक बनाती हैं। अतः आवश्यक है कि ऊँट को केवल पारंपरिक उपयोगिता की सीमित सोच से बाहर निकालकर नवाचारपूर्ण दृष्टिकोण के साथ संरक्षण एवं संवर्धन प्रदान किया जाए तथा विविध माध्यमों से समाज के प्रत्येक वर्ग को ऊँट संरक्षण अभियान से जोड़ने की सार्थक मुहिम चलाई जा रही है।
इस अवसर पर बीआरसी के संस्थापक श्री ईशान शर्मा एवं श्री गुरप्रीत सिंह ने कहा कि नगर के 5000 से अधिक विभिन्न आयुवर्ग के सदस्यों से युक्त बीआरसी केवल बीकानेर को फिटनेस की विशेष पहचान दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं एवं समाज को नशामुक्ति के प्रति जागरूक करने का अभियान चलाया जा रहा है जिसमें बीआरसी के सदस्य श्री मृदुल कच्छावा (आईपीएस), पुलिस अधीक्षक, बीकानेर का भी महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि ऊँट बीकानेर की विशिष्ट सांस्कृतिक एवं भौगोलिक पहचान का अभिन्न प्रतीक है। साथ ही वैश्विक स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाला एनआरसीसी, इस नगर की अमूल्य धरोहर है। ऐसे में उष्ट्र संरक्षण के लिए समर्पित इस प्रतिष्ठित संस्थान के इस अभियान से जुड़ना एक सामाजिक दायित्व भी है।
इस अवसर पर केन्द्र द्वारा दौड़ में शामिल सभी धावकों के लिए ऊँटनी के दूध से बने उत्पादों- सुगन्धित दूध, लस्सी एवं छाछ का आस्वादन कराया गया। वहीं इस अवसर पर ‘कैमल बटर मिल्क’ को भी प्रमोट किया गया। साथ ही इस दौरान केन्द्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राकेश रंजन, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रतन कुमार चौधरी, अन्य वैज्ञानिकगण, तकनीकी तथा प्रशासनिक अधिकारियों आदि द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की मुहिम ‘मृदा स्वास्थ्य एवं संतुलित उर्वरक उपयोग‘ जागरूकता अभियान का संदेश भी प्रचारित-प्रसारित किया गया।
केन्द्र वैज्ञानिक एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. श्रीशैलम द्वारा एनआरसीसी परिवार एवं बीआरसी के प्रति इस आयोजन को सफल व यादगार बनाने हेतु आभार व्यक्त किया गया वहीं सह समन्वयक डॉ. राजेन्द्र कुमार एवं डॉ. मितुल बुम्बड़िया ने कार्यक्रम रूपरेखा तैयार की गई ।

Subscribe to my channel


