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दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित बच्चों को मिल रहा संबल, मुख्यमंत्री आयुष्मान बाल सम्बल योजना से उपचार की राह आसान

*दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे बच्चों के लिए राहत बनी मुख्यमंत्री आयुष्मान बाल सम्बल योजना* *राजस्थान में 259 बच्चों को मिल रहा है योजना का लाभ*

ब्यूरो चीफ मुकेश कुमार शर्मा

 

खैरथल-तिजारा, 10 मार्च। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के निर्देशन में राजस्थान सरकार ने दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित बच्चों के उपचार और उनके परिवारों को आर्थिक सहारा प्रदान करने के उद्देश्य से “मुख्यमंत्री आयुष्मान बाल सम्बल योजना 2024” लागू की। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित यह योजना राज्य के ऐसे बच्चों के लिए महत्वपूर्ण पहल है जो भारत सरकार की राष्ट्रीय दुर्लभ बीमारी नीति 2021 के तहत सूचीबद्ध बीमारियों से पीड़ित हैं। इस योजना का उद्देश्य गंभीर और दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे बच्चों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना और उनके परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है।

दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित बच्चों को उपचार, देखभाल और आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराना समाज और सरकार दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार इस दिशा में निरंतर प्रयास कर रही है ताकि प्रदेश में कोई भी बच्चा केवल आर्थिक अभाव के कारण उपचार से वंचित न रहे। सरकार का उद्देश्य है कि दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित सभी पात्र बच्चों तक इस योजना का लाभ पहुंचे और उन्हें बेहतर उपचार एवं जीवन की आशा मिल सके।

योजना के अंतर्गत राज्य के ऐसे बालक और बालिकाएँ जिनकी आयु 18 वर्ष से कम है और जिन्हें राष्ट्रीय नीति के अनुसार दुर्लभ बीमारी से पीड़ित प्रमाणित किया गया है, वे आर्थिक सहायता के पात्र होंगे। इस योजना के लिए माता-पिता या पालनकर्ता की आय सीमा निर्धारित नहीं की गई है, जिससे अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवार इसका लाभ उठा सकें। पात्र बच्चों को उपचार के लिए अधिकतम 50 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इसके अतिरिक्त बच्चों की देखभाल और आवश्यक खर्चों के लिए प्रति माह 5000 रुपये की सहायता राशि भी प्रदान की जाती है।

दुर्लभ बीमारी का प्रमाणन केवल अधिकृत चिकित्सा संस्थानों द्वारा किया जाएगा। इसके लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), जोधपुर तथा जे.के. लोन अस्पताल, जयपुर को अधिकृत किया गया है। इन संस्थानों के सक्षम चिकित्सकों द्वारा जांच के बाद यदि किसी बच्चे में दुर्लभ बीमारी की पुष्टि होती है, तो उसे योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। उपचार के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित दुर्लभ बीमारी निधि का उपयोग किया जाएगा, जिसमें राज्य सरकार के अनुदान के साथ-साथ क्राउड फंडिंग, दानदाताओं और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के माध्यम से प्राप्त राशि भी शामिल की जा सकेगी।

राष्ट्रीय दुर्लभ बीमारी नीति 2021 के अनुसार कई गंभीर रोगों को दुर्लभ बीमारियों की श्रेणी में रखा गया है। इनमें लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर, म्यूकोपॉलीसैकराइडोसिस, एड्रेनोल्यूकोडिस्ट्रोफी, गंभीर संयुक्त प्रतिरक्षा कमी (SCID), क्रोनिक ग्रैनुलोमेटस रोग, विस्कोट एल्ड्रिच सिंड्रोम, ऑस्टियोपेट्रोसिस और फैंकोनी एनीमिया जैसे रोग शामिल हैं। इसके अलावा कुछ बीमारियाँ ऐसी भी हैं जिनका उपचार अंग प्रत्यारोपण के माध्यम से संभव है, जिनमें टायरोसिनेमिया, ग्लाइकोजन स्टोरेज डिजीज, मेपल सिरप यूरिन डिजीज, यूरिया चक्र विकार, ऑर्गेनिक एसिडेमिया, फेब्री रोग तथा पॉलीसिस्टिक किडनी रोग जैसे रोग सम्मिलित हैं।

कुछ दुर्लभ बीमारियाँ ऐसी होती हैं जिनमें लंबे समय तक उपचार, विशेष आहार या दवाओं की आवश्यकता होती है। इनमें फेनिलकेटोनुरिया, हाइपरफेनिलएलानिनेमिया, मेपल सिरप यूरिन डिजीज, टायरोसिनेमिया, होमोसिस्टिनुरिया, ग्लूटेरिक एसिडेमिया, मिथाइलमैलोनिक एसिडेमिया, प्रोपियोनिक एसिडेमिया, आइसोवालेरिक एसिडेमिया, गैलेक्टोसीमिया, ग्लूकोज-गैलेक्टोज अवशोषण विकार और गंभीर फूड प्रोटीन एलर्जी जैसे रोग शामिल हैं। वहीं कुछ रोग ऐसे भी हैं जिनका उपचार उपलब्ध है लेकिन उपचार अत्यधिक महंगा होता है। इनमें गौचर रोग, हर्लर सिंड्रोम, हंटर सिंड्रोम, पोम्पे रोग, फैब्री रोग, एमपीएस IVA, एमपीएस VI, सिस्टिक फाइब्रोसिस, ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी, वोलमैन रोग, न्यूरोनल सेरॉइड लिपोफ्यूसिनोसिस और हाइपोफॉस्फेटेसिया जैसी गंभीर बीमारियाँ शामिल हैं।

योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए पालनकर्ता ई-मित्र या एसएसओ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकता है। आवेदन के दौरान बच्चे की बीमारी से संबंधित चिकित्सकीय रिपोर्ट, जेनेटिक जांच रिपोर्ट तथा चिकित्सक का प्रिस्क्रिप्शन अपलोड करना आवश्यक होगा। आवेदन संबंधित जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के पास जाएगा, जिसके बाद इसे जांच और प्रमाणन के लिए अधिकृत अस्पताल भेजा जाएगा। यदि अस्पताल द्वारा दुर्लभ बीमारी की पुष्टि कर दी जाती है तो ऑनलाइन प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा और आर्थिक सहायता स्वीकृत हो जाएगी।

योजना के अंतर्गत पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रक्रियाएँ ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संचालित की जा रही है। आवेदन से लेकर प्रमाणन, स्वीकृति और भुगतान तक की पूरी जानकारी आवेदक को मोबाइल संदेश के माध्यम से दी जाएगी। इसके साथ ही प्रत्येक वर्ष नवंबर और दिसंबर माह में बच्चों का वार्षिक सत्यापन भी आवश्यक होगा, ताकि सहायता राशि का नियमित भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।

राजस्थान सरकार की यह योजना दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो रही है। महंगे उपचार के कारण अक्सर परिवार आर्थिक संकट में आ जाते हैं, ऐसे में यह योजना न केवल आर्थिक सहायता प्रदान करेगी बल्कि बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ भी उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। जिला परिवीक्षा एवं समाज कल्याण अधिकारी रमेश दहमीवाल ने बताया कि राजस्थान के 259 बच्चों को इस योजना का लाभ मिल रहा है।

 

Viyasmani Tripaathi

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